जलदाय विभाग: मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज का बड़ा फर्जीवाड़ा

-भाग सिंह
जयपुर। ठेकेदारों पर मेहरबानी के लिए मशहूर प्रदेश के जलदाय विभाग में एक ओर बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें फजीर्वाड़ा करने वाली फर्म को शिकायत के बाद विभाग के इंजीनयिर्स ने टेंडर से बाहर तो कर दिया लेकिन 420 करने के बाद भी फर्म पर आज दिनांक तक कोई कार्रवाई नहीं की। मामले में इजीनियर्स ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि फर्जी दस्तावेज लगाने पर फर्म को टेंडर से बाहर कर तो दिया गया है, अब क्या इतनी से बात के लिए फर्म को ब्लैकलिस्ट कर दे क्या? फजीर्वाड़ा करने वाली फर्म को लेकर विभाग के एक बड़े जिम्मेदार पद पर इंजीनियर के इस तरह के बयान से खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलदाय विभाग में इंजीनियर्स की ठेका फर्मों पर किस हद तक मेहरबानी बरस रही है।

दरअसल यह मामला है जलदाय विभाग के अतिरिक्त मुख्य अभियंता कार्यालय जयपुर-द्वितीय का है। कार्यालय की ओर से अप्रेल माह में निविदा संख्या 19, 20 व 21/2017-18 निकाली गई थी, जिसमें टेंडर शर्तो के अनुसार 30 जून, 2017 तक की वैद्यता का बिक्री कर प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य था। इन निविदाओं में मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर द्वारा 15 मई, 2017 तक की वैद्यता का बिक्री कर प्रमाण पत्र लगाया गया था, जो की पूरी तरह फर्जी था। बिक्री कर विभाग की ओर से मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर को 15 फरवरी, 2017 की दिनांक में बिक्री कर प्रमाण पत्र जारी किया गया था, जो कि 15 मार्च, 2017 तक की अवधि के लिए मान्य था। मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर द्वारा इस बिक्री कर प्रमाण में कांटछांट कर इसे 15 मई, 2017 तक के लिए मान्य कर लिया, जो कि पूरी तरह से 420 का मामला है। मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर द्वारा निविदाओं में फर्जी दस्तावेज लगाने की शिकायत अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर-द्वितीय डी.के.सैनी से गई, तो दस्तावेजों का फजीर्वाड़ा सामने आने के बाद निविदा से फर्म को बाहर कर दिया गया, लेकिन फर्म पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। शिकायतकर्ता द्वारा फजीर्वाड़े को लेकर फर्म पर कार्रवाई करने के मामले पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर-द्वितीय डी.के.सैनी ने यह कहते हुए गली निकाल ली कि फर्म को निविदा से बाहर कर दिया गया है और इतनी से बात के लिए फर्म को डी-बार या ब्लैकलिस्ट थोड़े ही कर सकते हैं। अब विभागीय कार्यशैली में पूरी तरह से डूब चुके अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर-द्वितीय डी.के.सैनी को कौन समझाए कि यह मामला भले ही कमीशनखोरी और मिलीभगत की नजर में देखने से इतना सा हो गया हो, लेकिन फजीर्वाड़े के ऐसे ही मामलों में विभाग द्वारा फर्मों पर डी-बार और ब्लैकलिस्ट करने जैसी काईवाई की जाती रही है।

फिर मैसर्स मेवेरिक पर क्यों की गई कार्रवाई?
विभाग के इसी अतिरिक्त मुख्य अभियंता जयपुर-द्वितीय कार्यालय में ऐसा ही एक मामला जगतपुरा के 49 करोड़ के टेंडर में सामने आया था, जिसमें मैसर्स मेवेरिक प्राईवेट लिमिटेड कंपनी द्वारा फर्जी दस्तावेज लगाने के मामले में न केवल निविदा से बाहर कर दिया, बल्कि उसे दो साल के लिए डी-बार करने के साथ ही फर्म की एक करोड़ की एसडी भी जब्त कर ली थी। फिर मैसर्स मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर के मामले में फर्म पर कार्रवाई नही होने से न केवल अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.के.सैनी की कार्यशैली सवालों के घेरे में है, बल्कि मामले को दबाने में उनकी पूरी मिलीभगत भी सामने आ रही है।

मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज पर साहब की मेहरबानी!
सूत्रों के अनुसार मैसर्स आदित्य एन्टरप्राईजेज, जयपुर पर काफी समय से विभाग के एक इंजीनियर साबह पूरी तरह से मेहरबान है। जिला खण्ड में रहते हुए साहब ने न केवल फर्म को करोड़ों रूपए के काम दिए, बल्कि वित्तीय सीमा बढ़ाकर भी करोड़ों रूपए की मोटी कमाई भी करवाई। ये अलग बात है कि साहब इसी वित्तीय सीमा वढ़ाने के मामले में बाद में भले ही सस्पेंड हो गए हो। बहाल होते ही साहब की फर्म पर फिर से मेहरबानी शुरू हो गई। नए जिले में पोस्टिंग मिलते ही साहब के पीछे-पीछे फर्म में जिले में पहुंच गई, जहां फिर से साहब ने करोड़ों रूपए के काम देकर फर्म को मालामाल कर दिया। विभाग में मैनेजर के रूप में अपनी पहचान बना चुके इन साहब की ये चचार्एं खूब होती है कि साहब जहां-जहां जाते हैं उनकी चहेती फर्में उनके पीछे-पीछे पहुंच ही जाती है। राजधानी में पोस्टिंग मिलते ही साहब की चहेती फर्म भी कमबैक हो गई। नई जगह पर आते ही साहब ने रॉब के दमपर चहेती फर्म को नियमों की धज्जियां उड़ाकर फिर से कई काम दे दिए हैं। सुनने में आया है कि फर्जी दस्तावेजों के मामले में भी फर्म को बचाने में साहब की कृष्ण लीला ही काम आई है।

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