Bombay High Court

मुंबई : उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीशों द्वारा प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की आलोचना को लेकर बंबई उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मुश्किल मौकों पर न्यायपालिका की गरिमा को बरकरार रखा जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर सहित चार न्यायाधीशों ने अभूतपूर्व तरीके से संयुक्त संवाददाता सम्मेलन किया, जिससे पूरी न्यायपालिका स्तब्ध रह गयी।  उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की प्रेस वार्ता और उनके आरोपों को लेकर बंबई उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश मंजुला चेल्लूर ने कहा कि जरूर कुछ ऐसा हुआ होगा, जिसको लेकर चार न्यायाधीशों को अपने दावे को लेकर लोगों को बीच आना पड़ा।

चेल्लूर ने कहा, ‘‘न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को बनाए रखने की दिशा में सभी तरह के कदम उठाये जाने चाहिए। अदालतें आखिरी स्थान होते हैं जहां लोग अपने विवादों को निपटाने के लिए जाते हैं।’’  पिछले महीने अवकाश प्राप्त करने वाली चेल्लूर ने कहा, ‘‘मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल और केंद्रीय कानून मंत्री एवं अन्य संबंधित लोग सभी पहलुओं पर ध्यान देते हुए उचित निर्णय करेंगे।’’  उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश वी जी पलाशिकर ने शीर्ष न्यायालय के न्यायाधीशों के आरोपों को ‘अभूतपूर्व’ करार दिया और कहा कि उन्हें सार्वजनिक तौर पर यह कहने से बचना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘आज का दिन अदालत के इतिहास के लिए काला देश है। उन्हें सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं थी। उन्हें (चार न्यायाधीशों को) उच्चतम न्यायालय की बैठक में इस मुद्दे को उठाना चाहिए था। अब हमें यह देखना है कि भारत के प्रधान

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