घोटाला

जयपुर। जलदाय विभाग की ओर से नलकूप निर्माण को लेकर जारी की गई नई बीएसआर की खामियों को लेकर राजस्थान ट्यूबवैल ड्रिलिंग कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन ने एतराज जताया है। एसोसिएशन की ओर से विभाग के प्रमुख शासन सचिव को ज्ञापन देकर नई बीएसआर को रिवाइज करने की मांग की है। एसोसिएशन की मांग पर प्रमुख शासन सचिव रजत कुमार मिश्र ने मुख्य अभियंता तकनीकी सदस्य को नई बीएसआर का परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य अभियंता तकनीकी सदस्य की ओर से नई बीएसआर को लेकर राजस्थान ट्यूबवैल ड्रिलिंग कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से दिए गए बिन्दुओं पर भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है।
दरअसल जलदाय विभाग की ओर से नलकूप निर्माण को लेकर 22 जून, 2018 को प्रदेशभर की एक ही बीएसआर जारी की गई थी। नई बीएसआर को लेकर प्रदेशभर के ठेकेदार कार्य करने में असहज महसूस कर रहे थे। राजस्थान ट्यूबवैल ड्रिलिंग कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में प्रदेशभर के ट्यूबवैल ठेकेदारों द्वारा 18 सितम्बर, 2018 को जलदाय विभाग के प्रमुख शासन सचिव रजत कुमार मिश्र को ज्ञापन देकर नई बीएसआर को अप्रासंगिक बताते हुए रिवाईज करने की मांग की गई। एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में बताया कि प्रदेश में अलग-अलग जगह की भौगोलिक स्थिति अलग-अलग है और कार्यों में काफी भिन्नता है। जयपुर क्षेत्र में जो ट्यूबवैल बनते हैं उनकी गहराई 125 से 150 मीटर तक होती है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में गहरे ट्यूबवैल बनते हैं, जिनकी गहराई 300 से 350 मीटर तक होती है। इसी प्रकार जयपुर क्षेत्र में ट्यूबवैल निर्माण के रोटरी ड्रिलिंग में पानी की लागत 10 से 15 हजार रूपए प्रति ट्यूबवैल आती है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में यह 80 हजार से 1 लाख तक आती है। बेंटोनाईट का खर्च जयपुर क्षेत्र में प्रति ट्यूबवैल 5 से 10 हजार रूपए आता है, वहंी बीकानेर क्षेत्र में बेंटोनाईट का खर्च 40 से 50 हजार तक आता है। ग्रेवल का खर्च जयपुर क्षेत्र में प्रति ट्यूबवैल 25 हजार तक आता है, वहीं बीकानेर में यह खर्च 80 हजार से एक लाख तक आता है। जयपुर क्षेत्र में मेटेरियल ट्रांसपोर्ट का खर्चा 5 हजार तक आता है, वहीं बीकानेर क्षेत्र में यह में 25 हजार तक आता है। इसी प्रकार जयपुर क्षेत्र में ट्यूबवैल के लिए एप्रोच की आवश्यकता नहीं होती, जबकि बीकानेर क्षेत्र में अधिकांश ट्यूबवैलों तक एप्रोच बनाकर जाना पड़ता है। मोटरपंप इंस्टालेशन का कार्य जयपुर क्षेत्र में मय ट्रांसपोर्टेशन 5 हजार ही आता है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में यह 15 से 20 हजार तक होता है। ट्यूबवैल विकास कार्य पर जयपुर क्षेत्र में 10 से 15 हजार खर्च होते हैं वहीं बीकानेर संभाग में यह 50 से 60 हजार तक होता है। जयपुर क्षेत्र में रोटरी ड्रिलिंग 200 एमएम पाइप के लिए 17 इंच से काम चल जाता है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में 200 एमएम पाइप के लिए 20 इंच का ट्यूबवैल बनाना पड़ता है। जयपुर क्षेत्र में 250 एमएम ट्यूबवैल नहीं बनता है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में 250 एमएम ट्यूबवैल के लिए 22 इंच का बोरिंग बनाना पड़ता है और ग्रेवल का खर्चा भी ज्यादा आता है। जयपुर क्षेत्र में डीटीएच ड्रिलिंग में ट्यूबवैल पर कम खर्च आता है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में जयपुर क्षेत्र की तुलना में दुगना खर्च आता है।

डीजल की दरें बढ़ने से ड्रिलिंग कार्य की लागत काफी बढ़ गई है। वहीं एमएस पाइप की दरें बढ़ने के साथ ही ट्यूबवैलों पर 8 प्रतिशत जीएसटी का खर्च भी बढ़ गया है। जयपुर क्षेत्र में 17 इंच के ड्रिलिंग से काम चल जाता है, जिसमें 8 इंच का पाइप लोरिंग होता है, जबकि बीकानेर क्षेत्र में रोटरी ड्रिलिंग व कॉम्बीनेशन ड्रिलिंग के लिए 20 से 22 इंच का बोरिंग करना पड़ता है और 90 फीसदी ट्यूबवैलों में 25 एमएम का पाइप लगाना पड़ता है और ग्रेवल भी ज्यादा लगती है। ऐसे में एसोसिएशन के बिन्दुओं पर पुर्नविचार करते हुए बीकानेर सहित अन्य क्षेत्रों की रिवाईज बीएसआर जारी करवाई जाए। साथ ही यदि नई बीएसआर जारी होने तक पुरानी बीएसआर पर ही निविदाएं आमंत्रित करने के आदेश प्रदान किए जाए, ताकि ट्यूबवैलों का समय पर निर्माण हो सके। एसोसिएशन की मांग पर प्रमुख शासन सचिव रजत कुमार मिश्र ने मुख्य अभियंता तकनीकी सदस्य को नई बीएसआर का परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य अभियंता तकनीकी सदस्य की ओर से नई बीएसआर को लेकर राजस्थान ट्यूबवैल ड्रिलिंग कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन की ओर से दिए गए बिन्दुओं पर भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है।

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