राजस्थान पुलिस के मुखिया डीजीपी मोहन लाल लाठर ने वर्ष 2021 की क्राइम रिपोर्ट मीडिया के सामने रखी। अपराध आंकड़े बता रहे हैं कि प्रदेश में महिला अत्याचार के अपराधों में सत्रह फीसदी बढ़ोतरी हुई है। हत्या, डकैती, लूट, चोरी जैसे गंभीर प्रवृत्ति के अपराध भी बढ़े हैं। एससी-एसटी वर्ग से जुड़े प्रकरणों में आठ फीसदी मामले ज्यादा आए है। घोड़ी से दलित दूल्हों को उतारने की घटनाएं भी बढ़ी है। क्राइम रिपोर्ट के मुताबिक, डकैती में 2.63, नकबजनी में 17.0 4, चोरी में 21.53, संपत्ति संबंधी अपराधों में 20.99 प्रतिशत तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो कि काफी चिंताजनक है। साइबर धोखाधड़ी के आंकड़ें तो काफी चौंकाने वाले है। पिछले साल नौ महीने के दौरान प्रदेश की जनता से ठगों ने करीब 55 करोड़ की साइबर ठगी को अंजाम दे दिया। इनमें से मात्र साढ़े पांच करोड़ की बरामदगी कर पाई राजस्थान पुलिस। पुलिस खुद मान रही है कि मेवात व अन्य कुछ स्थान साइबर ठगी के बड़े अड्डे बन चुके हैं। मीडिया में भी प्रमुखता से ऐसे ठगने वाले गांवों, स्थानों पर स्टिंग ऑपरेशन सामने आ चुके हैं। इसके बावजूद पुलिस साइबर ठगी पर लगाम नहीं लगा पा रही है और ना ही जिन लोगों से करोड़ों रुपयों ठगे जा चुके हैं, उनकी बरामदगी कर पाई। एक तरह से यह राजस्थान पुलिस का फेलियर है। वहीं गंभीर अपराधों के बढ़ते मामले भी दर्शाते हैं कि अपराधियों में पुलिस का इकबाल खत्म हो गया है। सरेआम अपराधी डकैती, लूट और चोरी को अंजाम दे रहे हैं। पुलिस पर ही फायरिंग करके फरार हो रहे हैं। पपला गुर्जर जैसे संगठित अपराधी गिरोह तो पुलिस थाने में हमला करके अपने सरगना और साथियों को छुड़ा लेकर जा रहे हैं। यहीं नहीं कई पुलिसकर्मी मादक, शराब तस्करी में लिप्त पाए गए हैं और उनकी गिरफ्तारी तक हुई। वरिष्ठ अधिकारियों की भी आपराधिक लोगों से सांठगांठ के मामले सामने आ चुके हैं। एक तरह से अपराधियों में पुलिस का खौफ खत्म सा हो गया है। ऐसे हालात मे कैसें गंभीर व संगठित अपराध गिरोह के खिलाफ लगाम लग पाएगी, यह सोचने की बात है। हालांकि राजस्थान पुलिस के मुखिया ने बढ़ते अपराधों पर चिंता जताते हुए नए साल में अपनी प्राथमिकताएं बताई है। कमजोर वर्ग, महिला, बच्चे, बुजुर्ग के विरुद्ध अपराधों की रोकथाम, मादक पदार्थों और अवैध हथियारों पर लगाम लगाने, महिला अत्याचार की रोकथाम. संगठित गिरोहों के खिलाफ अभियान चलाकर अकुंश लगाने का दावा किया है। यह तो समय बताएगा कि उक्त दावों में कितना दम है, लेकिन राजस्थान पुलिस को गंभीर अपराधों व संगठित अपराधिक गिरोहों की रोकथाम के लिए विशेष कार्य योजना तैयार करनी होगी। जिस तरह से मादक पदार्थों की तस्करी, हथियारों की तस्करी में लिप्त गिरोहों के विरुद्ध राजस्थान पुलिस ने अभियान छेड़ रखा है, वैसा ही अभियान संयुक्त रुप से साइबर अपराधियों व दूसरे गंभीर अपराधों के लिए चलाना होगा। गंभीर मामलों में त्वरित अनुसंधान करके अपराधियों को सलाखों के पीछे डालने जैसे कदम उठाने होंगे, तभी अपराधियों और अपराध करने वालों में पुलिस का खौफ होगा और पुलिस का इकबाल कायम रह पाएगा।

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