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चितौड़गढ़. भारतीय जनता पार्टी के पूर्व कार्य समिति सदस्य डाॅ. (सीए) आई.एम. सेठिया ने मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे को पत्र भेजकर राजस्थान के ठेकेदारों पर जीएसटी दर में वृद्वि के कारण पड रहे अनावष्यक आर्थिक भार को राज्य सरकार द्वारा वहन करने की मांग करते हुए बजट सत्र में ही उचित घोषणा करने की मांग की। सेठिया ने पत्र में कहा कि ठेकेदार राज्य के विकास एवं राज्य सरकार की उपलब्धियों को जनता के समक्ष प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। ठेकेदारों की समस्या पर तत्काल सकारात्मक निर्णय कर वर्तमान बजट सत्र में ही यदि घोषणा की जाती है तो पूरे राज्य में पार्टी के प्रति विष्वास में भी सकारात्मक परिवर्तन संभव हो सकेगा।

राजस्थान के सिविल ठेकेदारो की जायज समस्या की गंभीरता को देखते हुए बजट सत्र के दौंरान ही समाधान करने हेतु निम्न आधार पर आग्रह है, जीएसटी प्रभावी होने से पूर्व ठेकेदारो पर 0.75 से 3 प्रतिषत तक का वेट कानून के अन्तर्गत दायित्व होता था परन्तु 30 जून के पष्चात सम्पन्न कार्यो पर जीएसटी की नवीन दरों के तहत 12 प्रतिषत का कर दायित्व आने से राज्य के सभी ठेकेदारों पर 9 से 12 प्रतिषत का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ रहा है जो प्रत्यक्षतः ठेकेदारों की आर्थिक स्थिति को सीधा-सीधा प्रभावित कर रहा है। जीएसटी के दायरे में आने के पूर्व भी कर राज्य सरकार को ही वहन करना होता था व जीएसटी के पष्चात भी यह भार राज्य सरकार को ही वहन करना होगा इसी सिद्वान्त के चलते वेट एवं जीएसटी दरों का अन्तर भी राज्य सरकार को ही वहन करना है। ठेकेदार प्रतिस्पर्धात्मक दरों पर निविदा प्रक्रिया में भाग लेते है उसमें यदि जीएसटी की अतिरिक्त राषि का भार यदि ठेकेदारों पर पड़ गया तो बजाय लाभप्रदत्ता के उनको भारी आर्थिक हानी वहन करनी होगी जो सरासर अनुचित है। अनुबन्ध की शर्तो एवं व्यापार के सामान्य नियमों में यह दायित्व राज्य सरकार को ही वहन करना चाहिए। केन्द्र सरकार एवं विभिन्न राज्य सरकारों ने वास्तविक स्थिति का आंकलन कर, कर की अन्तर राषि को वहन करने हेतु आदेष जारी किए है। इनमें रेल मंत्रालय के आदेष दिनांक 27.10.2017 मध्यप्रदेष सरकार के आदेष व भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का पत्र दिनांक 15.06.2017 प्रमुख है।

राज्य में ठेकेदारों की संख्या को देखते हुए राज्य सरकार के प्रति विपरीत भावना का जागृत होना भी ठीक नही है एवं वास्तविक समस्या का तत्काल समाधान बजट सत्र में ही तलाषा जाकर उचित घोषणा विधानसभा के चालू सत्र में ही की जानी चाहिए, ताकि नकारात्मक वातावरण को सकारात्मक वातावरण में परिवर्तित किया जा सके। वित्तीय भार की राषि अप्रत्यक्ष रूप से केन्द्र सरकार से राज्य सरकार को प्रदत्त हो जाने से कोई अतिरिक्त आर्थिक भार राज्य सरकार पर पड़ने की संभावना नहीं है। चितौड़गढ़ जिला कान्टेªक्टर्स एसोसिएषन द्वारा भारतीय जनता पार्टी प्रदेषाध्यक्ष जी को प्रेषित पत्र की प्रति आपके अवलोकनार्थ संलग्न की जा रही है। सभी ठेकेदार राज्य के विकास में अपनी प्रमुख भागदारी निभाते है। राज्य सरकार की नीतियों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी में इनकी महती भूमिका को देखते हुए इनकी वास्तविक समस्या पर भी सरकार द्वारा तत्काल निर्णय अपेक्षित है।

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