जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने आरएएस भर्ती-2016 में आरपीएससी से पूछा है कि एसबीसी के कितने अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल किया गया, जिससे सामान्य श्रेणी के अभ्यर्थी प्रभावित हुए। न्यायाधीश मनीष भंडारी और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश आरपीएससी की ओर से दायर अपील पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने यह भी बताने को कहा है कि यदि परिणाम संशोधित होगा तो एसबीसी के कितने अभ्यर्थी बाहर होंगे और सामान्य वर्ग के कितने अभ्यर्थी चयन प्रक्रिया में शामिल हो जाएंगे। इसके अलावा बाहर होने वाले अभ्यर्थियों में से कितने अभ्यर्थी चयनीत हो रहे हैं। अदालत ने माना कि ओबीसी आरक्षण 21 फीसदी से अधिक नहीं हो सकता। ऐसा होने पर सामान्य वर्ग के पदों पर प्रभाव पडेगा।

अपील में आयोग की ओर से कहा गया कि आरएएस भर्ती-2016 की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम 1 दिसंबर 2016 को जारी हुआ था। जिसमें एसबीसी को आरक्षण का लाभ दिया गया। वहीं 9 दिसंबर 2016 को हाईकोर्ट ने एसबीसी आरक्षण को रद्द कर दिया। इस पर 22 जून 2017 को आयोग ने एसबीसी के पदों को सामान्य वर्ग में शामिल कर लिया। वहीं मानसी तिवाडी व अन्य की ओर याचिका दायर कर एक ही भर्ती में आरक्षण के अलग-अलग प्रावधान करने को चुनौती दी गई। जिस पर एकलपीठ ने मुख्य परीक्षा का परिणाम रद्द कर प्रारंभिक परीक्षा का संशोधित परिणाम जारी करने को कहा। इस आदेश के खिलाफ आरपीएससी की ओर से खंडपीठ में अपील की गई। अपील में कहा गया कि एसबीसी का आरक्षण रद्द करने से पहले प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ था। वहीं आरक्षण रद्द होने के बाद एसबीसी के पदों को सामान्य वर्ग में शामिल किया गया। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ आरपीएससी से वर्गवार जानकारी पेश करने को कहा है।

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