जयपुर. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा देश हिंदू राष्ट्र बन चुका है। केवल औपचारिक घोषणा बाकी है, बाकी धर्मों को आपने दबा दिया। ये अब देश के अलग-अलग अल्पसंख्यक वर्गों को टारगेट करेंगे। पहले मुस्लिम, फिर इसाई, फिर सिखों को टारगेट करेंगे। बीजेपी, आरएसएस धर्म की राजनीति को पीक पर ले गए हैं और चुनाव जीत रहे हैं। क्या यह डेमोक्रेसी है। गहलोत ने जयपुर में मंगलवार को मीडिया से बातचीत करते हुए यह कहा। गहलोत ने कहा कांग्रेस की सॉफ्ट अप्रोच के कारण आरएसएस ने 100 साल निकाल दिए। आरएसएस और बीजेपी यहां तक आए हैं तो कांग्रेस की सॉफ्ट अप्रोच की वजह से आए हैं। इनकी हरकतों की तरह अगर कांग्रेस इनके साथ व्यवहार करती तो आज न बीजेपी पनपती, न आरएसएस पनपता। आरएसएस, बीजेपी को कांग्रेस का शुक्रिया अदा करना चाहिए, वे यहां तक पहुंचे हैं। वहीं गहलोत ने कहा- स्पीकर साहब के एरिया में राहुल गांधी आ रहे हैं, उन्हें उनका वेलकम करना चाहिए। जिस हाउस के वे स्पीकर हैं, उसी हाउस के नेता प्रतिपक्ष खुद वहां आ रहे हैं। स्वागत करने की बात तो दूर, वहां ऐसा संदेश दे दिया गया है जैसे ओम बिरला इसके खिलाफ हैं और कोई भी वहां न जाए। इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि आखिर यह नौबत क्यों आई? यह सब किसके इशारे पर हुआ? गहलोत ने कहा कांग्रेस का रवैया आरएसस-बीजेपी जैसा होता तो ये पनपते ही नहीं। दो बार बैन किया और बैन हटा दिया। कांग्रेस सरकारों के खून में नहीं रहा कि बदले की भावना से काम करें। आरएसएस वाले कहते हैं कि कांग्रेस राज में हमारे काम ज्यादा होते थे। कांग्रेस सरकारों ने कभी आरएसएस के परिवारों पर बदले की भावना से काम नहीं किया। अशोक गहलोत ने कहा देश में राहुल गांधी के इस अभियान की शुरुआत राजस्थान के कोटा से हो रही है। वे ट्रेन से आ रहे हैं और आप वहां के कोचिंग संस्थानों को धमकियां दे रहे हैं कि आपके इंस्टीट्यूशंस में कई कमियां हैं। नतीजे भुगतने के लिए तैयार रहो। अगर खुद स्पीकर के लोकसभा क्षेत्र में ऐसी स्थिति बनती है, तो पूरे मुल्क में क्या संदेश जाएगा? क्या यहां डेमोक्रेसी है? गहलोत ने कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा पर तंज कसते हुए कहा मंत्री के एजेंट पकडे़ जा रहे हैं। मंत्री ने पहले भी इस्तीफा दे रखा है। करप्शन की बात पर कह रहे हैं कि उनकी भागीदारी साबित हो तो वो इस्तीफा दे सकते हैं। जबसे ये राजनीति में आए हैं, इनकी फितरत ऐसी ही रही है। किरोड़ी की यूएसपी यही है कि वे अपनी सरकारों और अपने ही मुख्यमंत्री पर कटाक्ष करते हैं। लोगों से वादा करते हैं कि फलां कदम उठा सकते हैं।
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