जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने जोधपुर, पाली, बालोतरा, जसोल आदि के औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों से नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाये रखने की ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा हैै। उन्होंने संबंधित जिलों के जिला कलक्टरों को भी निर्देश दिए हैं कि जोजरी नदी सहित क्षेत्र की नदियों में उद्योगों का प्रदूषित पानी नहीं जाए इसके लिए प्रभावी उपायों के साथ प्रस्ताव तैयार कर भिजवाएं। नदियों को पानी को प्रदूषित नहीं होने देने की सबकी जिम्मेदारी है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सोमवार को शासन सचिवालय में जोधपुर, पाली, बालोतरा के उद्योग संघों और सीईटीपी संचालन समितियों के प्रतिनिधियों से रुबरु हो रहे थे। उन्होंने वर्चुअल बैठक में संबंधित जिलों के जिला कलक्टरों से भी चर्चा की। मुख्य सचिव श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार सदैव संवाद कायम करने और बातचीत से समस्या के समाधान के प्रति गंभीर रही है।ऐसे में उद्योगों का निर्बाध संचालन हो पर समाज के व्यापक हित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए उद्योगों का प्रदूषित पानी नदियों में प्रवाहित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीईटीपी संयत्रों का पूरी क्षमता से संचालन हो और उनके रखरखाव को इस तरह से रखा जाए ताकि प्रदूषित पानी का रिसाव ना हो सके। अतिरिक्त मुख्य सचिव माइंस एवं अध्यक्ष राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल अपर्णा अरोरा ने कहा कि जोजरी सहित क्षेत्र की अन्य नदियों में प्रदूषित पानी को माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गंभीरता से लिया जा रहा है। वैसे भी उद्योगों के हानिकारक केमिकल युक्त पानी का निष्पादन सीईटीपी प्लांट के स्थान पर नदियों में प्रभावित करने से नदियां प्रदूषित हो रही है और मजबूरी में उद्योगों को बंद करने का अप्रिय निर्णय तक लेना पड़ता है। पर्णा अरोरा ने प्रदूषित पानी को वैज्ञानिक तरीके से निष्पादित करने और नदियों में जाने से पूरी तरह से रोकना होना। उन्होंने आईआईटी सहित संस्थाओं की सहभागिता से प्रदूषित पानी के निषपादन की वैज्ञानिक तकनीक अपनाने को कहा। राज्य प्रदूषण नियंत्रण मण्डल के सदस्य सचिव कपिल चंन्द्रावल ने पीपीटी के माध्यम से विस्तार से जानकारी दी।

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