Two lakh girls applied for minority scholarship scheme, but the beneficiaries limit 50,000

नयी दिल्ली। अल्पसंख्यक समुदायों की स्कूली छात्राओं की दी जाने वाली छात्रवृत्ति से जुड़ी केद्र सरकार की योजना के लिए इस बार ‘रिकॉर्ड’ दो लाख से अधिक लड़कियों ने आवेदन किया है, लेकिन सभी ‘योग्य’ आवेदकों को छात्रवृत्ति मिलने की संभावना नहीं है क्योंकि लाभार्थियों की सीमा 50,000 है। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधीनस्थ संस्था ‘मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन’ (एमएईएफ) की ओर से मेधावी स्कूली लड़कियों के लिए बेगम हजरत महल राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना चलाई जाती है। पिछले कई वर्षों से इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं कक्षा की लड़कियों को छात्रवृत्ति दी जाती रही है, लेकिन इस बार योजना के दायरे में नौवीं और 10वीं कक्षा की लड़कियों को भी शामिल किया गया है। एमएईएफ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘भाषा’ को बताया कि इस छात्रवृत्ति योजना के तहत बीते शुक्रवार तक कुल 215,000 से अधिक लड़कियों ने ऑनलाइन आवेदन किया। ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तिथि 15 नवंबर है । अधिकारी ने कहा, ‘‘जिस तरह से आवेदकों की संख्या बढ़ रही है, उससे लगता है कि 15 नवंबर तक यह संख्या 230,000 तक पहुंच जाएगी। यह संख्या अपने आप में रिकॉर्ड है। आम तौर पर देखा गया है कि आवेदन करने वाली लड़कियों में कम से कम 70 फीसदी छात्रवृत्ति पाने के योग्य होती हैं।’’ पिछले साल सिर्फ 45,000 लड़कियों के आवेदन मिले थे और इनमें से करीब 36,000 को छात्रवृत्ति दी गई।

एमएईएफ के सामने इस बार सबसे बड़ी चुनौती होगी कि किस तरह से सीमित बजट में सभी योग्य आवेदकों को छात्रवृत्ति प्रदान की जाए। योजना के लिए 60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित है। इस बारे में पूछे जाने पर एमएईएफ के कोषाध्यक्ष मोहम्मद शाकिर हुसैन अंसारी ने कहा, ‘‘यह बात सही है कि इस बार आवेदकों की संख्या बहुत अधिक है और ऐसे में सभी योग्य आवेदकों को छात्रवृत्ति मुहैया कराना मुश्किल रहेगा। वैसे, अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने भरोसा दिलाया है कि इस बार लाभार्थियों की संख्या बढ़ाई जाएगी।’’ बीते शुक्रवार को नकवी की अध्यक्षता में एमएईएफ की बैठक हुई जिसमें मुख्य रूप से इस छात्रवृत्ति योजना को लेकर चर्चा की गई। आवेदकों की संख्या में इतनी बढ़ोतरी के बारे में पूछे जाने पर अंसारी ने कहा, ‘‘एक वजह यह है कि इस बार नौवीं और 10वीं की छात्राओं को भी योजना के दायरे में शामिल किया गया है। दूसरी वजह जागरूकता बढ़ना है। जागरूकता के कारण ही इस बार 11वीं कक्षा की करीब 84,000 लड़कियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया है।’’ वैसे, लाभार्थियों की संख्या कुछ हजार बढ़ाने पर भी शायद हजारों लड़कियों को निराश होना पड़े। एमएईएफ के अधिकारी ने कहा, ‘‘हमारी कोशिश होगी कि ज्यादा से ज्यादा लड़कियों को छात्रवृत्ति मिले, लेकिन यह देखना होगा कि मंत्रालय की तरफ से लाभार्थियों की संख्या कितनी बढ़ाई जाती है।’’

कोई जवाब दें