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जयपुर। बीएसएफ में असिस्टेंट कमांडेंट जितेन्द्र सिंह की शहादत पर आज सभी की आंखें नम है। आज राजकीय सम्मान से इस मरुधरा के लाडले को अंतिम विदाई दी गई। देश के लिए जितेन्द्र सिंह शहीद हो गए। आज से डेढ़ महीने पहले ही राजस्थान विश्वविद्यालय में पीएचडी डिग्री पूरी होने पर जितेन्द्र सिंह लोक प्रशासन विभाग आए थे। वहां शिक्षकों की मौजूदगी में छात्रों को कहा था कि अनुशासन में रहकर पढ़ना चाहिए।

इससे परिणाम सकारात्मक आएगा। उन्होंने सीमाओं की चर्चा करते हुए यह भी कहा कि पता नहीं हम कब देश के लिए शहीद हो जाए। ये शब्द उन साथियों व शिक्षकों के मन में बुधवार को अनायास ही उभर आए, जब जितेन्द्र सिंह की शहादत की सूचना उनके पास पहुंची। एक बार तो लगा कि यह झूठी सूचना है, लेकिन जब टीवी चैनलों पर जितेन्द्र सिंह के शहीद होने की सूचना पढ़ी तो डेढ़ महीने कही गई वह बात सामने आ गई। जितेन्द्र सिंह कहा करते थे कि वे देश सेवा के लिए आर्मी ज्वाइन की है। मरते दम तक आर्मी में रहना चाहते हैं। लोक प्रशासन विभाग के विभागाध्यक्ष अशोक सिंह ने बताया कि जितेंद्र सिंह होनहार छात्र थे।

वे हमेशा जूनियर और युवाओं को देश सेवा के लिए आर्मी ज्वाइन करने के लिए प्रेरित करते थे, साथ ही हमेशा मदद के लिए भी तैयार रहते थे। जितेन्द्र सिंह के शहीद होने की सूचना मिली तो विश्वास ही नहीं हुआ। उसकी हमेशा याद आती रहेगी। विभाग की तरफ से शहीद जितेंद्र सिंह के नाम से विभाग के मेधावी छात्रों को हर साल गोल्ड मेडल देने और डिपार्टमेंट में प्रतिवर्ष एक स्मृति व्याख्यान का आयोजन करने के प्रस्ताव तैयार किया है। इस प्रस्ताव को कुलपति के पास भेजा जाएगा।

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