– राकेश कुमार शर्मा 

जयपुर। ओलावृष्टि, नोटबंदी की मार झेल रहे राजस्थान के किसानों को राज्य की ग्रामीण विकास योजनाओं का भी पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सरकार की लापरवाही कहे या जनप्रतिनिधियों की उदासीनता, केन्द्र और राज्य सरकार के इस मद में देय ग्रामीण विकास का बजट खर्च नहीं हो पा रहा है। इससे राजस्थान के गांवों को विकास नहीं हो पा रहा है। स्थिति यह है कि ग्रामीण विकास योजनाओं की क्रियान्विति काफी खराब है। सांसदों के मुकाबले विधायकों की रुचि भी इस कोष की तरफ नहीं है। मनरेगा की तरह ग्रामीण विकास के भी बुरे हालात हैै। इस वित्तीय साल के 10 महीने से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक तय बजट में मात्र 53 फीसदी खर्च हो पाया है। हालात यह है कि मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्वाचन जिले झालावाड जिले में तो मात्र 17 फीसदी राशि ही खर्च हो पाई। ऐसे ही हालात कुछ दूसरे जिलों के हैं। ग्रामीण विकास विभाग के तहत सांसद स्थानीय निधि कोष, विधायक स्थानीय निधि कोष, सीमा क्षेत्र विकास परियोजना, मेवात क्षेत्र विकास योजना, डांग क्षेत्र विकास योजना सहित आठ प्रमुख योजनाएं चलती है। इनमें से तीन को छोड कर अन्य सभी योजनाएं प्रदेश के सभी जिलों के लिए है। योजनाओं के तहत गांवों में विकास के विभिन्न कार्यक्रम चलाए जाते है। पैसा राज्य सरकार जारी करती है और योजनाएं जिलों के माध्यम से संचालित की जाती है।
ग्रामीण विकास योजनाओं के आंकड़ों के मुताबिक ग्रामीण विकास योजना के तहत सांसद कोष योजना सबसे अच्छी स्थिति में रही है। सांसद कोष योजना का 98 प्रतिशत पैसा खर्च हो चुका है, जबकि विधायक कोष योजना में 49.12 प्रतिशत पैसा ही खर्च हुआ है। सबसे कम पैसा 22.61 प्रतिशत राशि स्वविवेक जिला विकास ा योजना के तहत खर्च हुआ है। पूर्वी राजस्थान के डांग क्षेत्र के विकास के लिए चलने वाली विशेष योजना के तहत भी सिर्फ 23 प्रतिशत राशि खर्च हो पाई है।

– मंत्री राठौड़ ने शत-प्रतिशत राशि खर्च की, मुख्यमंत्री जिला फिसड्डी रहा 

आंकड़ों के मुताबिक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के निर्वाचन जिले झालावाड में सबसे कम 17 फीसदी राशि खर्च हो पाई है। यहीं जिला रैकिंग के मामले में सबसे नीचे है। ग्रामीण विकास मंत्री राजेन्द्र राठौड का निर्वाचन व गृह जिला चुरू सबसे ऊपर है। राठौड़ ने चूरू में शत प्रतिशत राशि खर्च की है। राजस्थान में चार जिले ही ऐसे है, जहां 70 प्रतिशत से अधिक राशि खर्च हुई है। शेष जिले फिसड्डी साबित हुए हैं। ग्रामीण विकास की आठों योजनाओं में दिसम्बर तक 30 फीसदी राशि खर्च की गई थी। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस पर काफी नाराजगी जाहिर की थी। मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए थे मौजूदा वित्तीय वर्ष समाप्त होने तक (मार्च तक) योजना के तहत अस्सी फीसदी राशि खर्च हो जाए। अब आनन-फानन में बजट को ठिकाने लगाने के चक्कर में अनियमितताओं की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है।

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