नई दिल्ली। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विगत तीन हफ्तों से दिल्ली के जंतर-मंतर पर इंसानी खोपडिय़ों के साथ प्रदर्शनरत तमिलनाडु स्थित कावेरी बेसिन के किसानों का आंदोलन सोमवार को एक अलग ही रुप में देखने को मिला। पीएम नरेन्द्र मोदी से मुलाकात नहीं होने से खफा किसानों ने विरोध जताते हुए पीएम आवास के समीप कपड़े उतारकर दौड़ लगाई। पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर दिल्ली पुलिस के डीसीपी कार्यालय से मिला आश्वासन जब पूरा नहीं हुआ तो किसान भड़क उठे। किसान पीएमओ पहुंचे तो उनको यह कह दिया गया कि वे अपना मांगपत्र एक अधिकारी को दे दें और यहां से चले जाए। इस दौरान किसानों ने मौके पर मौजूद अधिकारी से कहा कि आखिर पीएम नरेन्द्र मोदी उनसे मुलाकात क्यों नहीं करते। राष्ट्रीयकृत बैंकों के कर्जे को माफ करने, फसलों की उचित कीमत के साथ पेयजल किल्लत को दूर करने संबंधि उनकी मांगों को अनसुना देख किसानों में रोष व्याप्त हो गया। इस दौरान कुछ किसान अपने कपड़े उतारकर प्रदर्शन करने लगे। वे सड़क पर लेट गए तो पुलिस ने उन्हें खेंचकर वहां से हटाया और गिरफ्तार कर लिया। प्रदर्शनरत किसान अय्याकन्नू ने कहा कि हमारे राज्य की स्थिति दयनीय है, पीएम ने मिलने से मना कर दिया, अब हमारे पर कोई चारा नहीं बचा तो यह कदम उठाना पड़ा। इधर इंसानी खोपडिय़ों के साथ प्रदर्शनरत किसानों ने दावा किया कि ये खोपडिय़ा उन किसानों की हैं जो कर्ज के चक्कर में फंस गए। इनकी मौत भूख से हुई या आत्महत्या कर ली। कावेरी बेसिन की जमीन उपजाऊ हुआ करती थी, आज वहीं का धरतीपुत्र आत्महत्या को मजबूर हैं। न केन्द्र सुन रहा है न राज्य सरकार।

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