Trial of Dr. Abdul Hameed's Death Reference upto High Court hearing till 26

जयपुर। एमडी रोड पर तकिया लाल शाह के नाम से चर्चित सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण से जुड़े मामले में विवाद के 26 साल बाद अब कब्जेदार बाबू खां की अपील एडीजे-11 जयपुर मेट्रो कोर्ट ने खारिज कर दी। इससे पूर्व 13 जनवरी, 2०14 को निचली कोर्ट एसीएमएम-3 ने बाबू खां को अतिक्रमी मानते हुए टीआई खारिज कर दी थी। बाबू खां ने निचली कोर्ट में 1992 में एसएचओ-मोती डूंगरी, राज्य सरकार के जरिए कलक्टर एवं वक्फ बोर्ड के खिलाफ मुकदमा कर बताया था कि साढ़े 7 बीघा जमीन 191० में जयपुर रियासत ने लालशाह पुत्र पीरा शाह के नाम से दी थी, जो सेटलमेंट के सर्वे रिकॉर्ड में दर्ज है।

माधोसिंह के समय पट्टा दिया गया था। वारिस नन्ने शाह की मौत होने के बाद उत्तराधिकारी बने रहिमन ने 14 जुलाई, 1969 को बाबू खां के पक्ष में वसीयत की थी। जनवरी 1992 में विवादित जमीन पर वह जर्जर टीन को बदल रहा था। मोती डूंगरी थाना पुलिस ने मौके पर आकर काम रुकवा दिया और विवादित जमीन को सरकारी बताया। उपरोक्त जमीन पर बाबू खां ने 1969 से ही अपना कब्जा बताते हुए 5 फरवरी, 1992 को कोर्ट में दावा पेश किया। जिसका राज्य सरकार ने विरोध करते हुए अपील खारिज करने की मांग की। वक्फ बोर्ड ने दलील दी कि राज्य सरकार ने 23 सितम्बर, 1965 को उपरोक्त जमीन बोर्ड को दी थी। जो वक्फ सम्पत्ति है। उभय पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपील कोर्ट ने अपील खारिज करते हुए आदेश में कहा कि वसीयतकर्ता को उपरोक्त वसीयत करने का अधिकार ही नहीं था।

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