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Syndicate Bank, loan scam, CBI custody

जयपुर। सिंडिकेट बैंक की वैशाली नगर शाखा में हुए 2.7० करोड़ रुपए के गबन के मामले में आरोपी गुमान खण्डेलवाल की अग्रिम जमानत अर्जी सीबीआई कोर्ट-एक में जज बुद्धिप्रकाश छंगाणी ने गंभीर अपराध बताते हुए खारिज कर दी। इस मामले में आरोपी गुमान के पति एवं अन्य मामले में जेल में बंद बिल्डर शंकर खण्डेलवाल को जेल से पेश किया गया। कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में लेकर उसे इस मामले में जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए। शंकर खण्डेलवाल को अशोक नगर एवं वैशाली नगर थाना पुलिस ने धोखाधडी के मामले में गिरफ्तार किया था।

इस मामले में सीबीआई ने पिछले दिनों अनुसंधान कर वैशाली नगर शाखा के तत्कालीन सीनियर मैनेजर एवं बर्खास्त हुए रघुनाथ प्रसाद बाकोलिया सहित 18 मुल्जिमों के खिलाफ चालान पेश किया है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दिए गए उपरोक्त ऋणों को लेकर सीबीआई ने 21 नवम्बर, 2०17 को मुकदमा दर्ज किया था। अन्य आरोपियों में मोहनलाल चौधरी, अर्जुन सिंह चौहान, हेमराज जैन, दातार सिंह, सुरेन्द्र पारीक, खुशाल माथुर, उसकी पत्नी गौरी माथुर, सुशील कुमार झालानी, महेश चन्द जांगिड़ तथा गोपाल लाल सैनी शामिल है, जिन्हें कोर्ट ने जमानत-मुचलकों पर रिहा कर दिया।

सूचना के बाद भी हाजिर नहीं होने पर आरोपी धर्मेन्द्र मैथ्यू उसकी पत्नी मीता तथा बिल्डर शंकर खण्डेलवाल की पत्नी गुमान के खिलाफ कोर्ट ने अरेस्ट वारन्ट जारी किये। शंकर खण्डेलवाल के खिलाफ कोर्ट ने प्रोडक्शन वारंट जारी कर 5 फरवरी को तलब किया था। मामले में आरोपी असिस्टेंट मैनेजर प्रिया पारीक के खिलाफ अभी अभियोजन स्वीकृति नहीं मिली है। सीबीआई ने शंकर और गुमान की दोनों कम्पनियों जयपुर लेण्ड मार्क तथा रॉयल स्टार एन्टरप्राइजेज को भी दोषी मानते हुए 18 मुल्जिमों में शामिल किया है।

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