Humanity is shy
docter rape

जयपुर। विवाहित होते हुए भी एक विवाहिता के साथ दुष्कर्म कर सन्तान पैदा करने के मामले में अभियुक्त दर्शन बैरवा (3०) निवासी कृपारामपुरा-चाकसू को महिला उत्पीड़न मामलों की स्पेशल कोर्ट-दो में जज सुनील कुमार गोयल ने सोमवार को 7 साल के कठोर कारावास एवं 1०,5०० रुपए के जुर्माने की सजा से दण्डित किया है। अभियुक्त ने स्वयं को शिवचरण माथुर संस्थान में चपरासी बताते हुए घटना के दिन ऑफिस में उपस्थिति का साक्ष्य पेश किया।

कोर्ट ने आदेश में कहा कि उपरोक्त घटना दोपहर 3 बजे बाद हुई है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ऑफिस आने के बाद ऑफिस में या बाहर का भी कार्य करते हैं। पीड़िता की ओर से अभियुक्त को प्रेम पत्र लिखने पर कोर्ट ने कहा कि पीड़िता ने पत्रों में संबंध बनाने का प्रस्ताव या आमंत्रण नहीं था। पीड़िता के दुष्कर्म से गर्भवती होने की जानकारी मिलने के बाद उसे ससुराल और पीहर वालों ने त्याग दिया। महिला सदन में रहकर जीवनयापन करना पड़ा।

कोर्ट ने आदेश में कहा कि घटना से पीडिèता का जीवन अन्धकार हुआ है एवं ऐसी सन्तान का पालन करने के लिए विवश है, जिसका पिता पर पुरुष है। अदालत ने मामले में आरोपी पीड़िता की चाची, गीता बैरवा, दर्शन के भाई विनोद ड्राईवर एवं ममेरे भाई महेन्द्र बैरवा को सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। कोर्ट ने पीड़िता व उसकी सन्तान के पुनर्वास के लिए पीड़ित प्रतिकर स्कीम में विधिक सेवा प्राधिकरण को मुआवजे के लिए आदेश की प्रतिलिपि भ्ोजने के भी आदेश दिए हैं।
पीड़ित महिला ने 27 अप्रेल, 2०13 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 2 फरवरी, 2०12 को दर्शन उसे भाई के बीमार बता कर ससुराल से झालाना डूंगरी लाकर दुष्कर्म किया था। 2-3 माह बाद आरोपी गीता ने कमरे में बंद कर दुष्कर्म करवाया, जिससे वह गर्भवती हो गई। इसकी जानकारी मिलने पर पीहर व ससुराल से उसे आश्रय नहीं मिला था। सन्तान की डीएनए जांच में दर्शन ही बायलोजिकल पिता साबित हुआ।

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