राजस्थान में शुक्रवार को रिकॉर्ड तोड कोरोना केस सामने आए हैं। करीब सोलह हजार से अधिक पॉजिटिव केस दर्ज किए गए हैं। साथ ही पन्द्रह कोरोना मरीज की मौत भी हुई है। करीब छह महीने बाद इतनी मौतें शुक्रवार को हुई है, जो कि चिन्ताजनक है। इससे पहले जून, 2021 में एक ही दिन में पच्चीस मौतें सामने आई थी। राजस्थान में16 हजार 878 नए पॉजिटिव मिले। इनमें से 4035 केस जयपुर में मिले हैं। तीन मौतें भी जयपुर में हुई है। जयपुर के बाद जोधपुर में 2222, अलवर में 1371
अजमेर में 657, भरतपुर में 898, चित्तौड़ग़ढ़ में 682, डूंगरपुर में 439, पाली में 504, उदयपुर में 857 नए केस सामने आए। जयपुर में तीन मौतों के अलावा अजमेर, बीकानेर में 2-2 मरीजों ने दम तोड़ दिया। जयपुर समेत अन्य जिलों में शुक्रवार को अन्य दिनों से अधिक केस सामने आए हैं। मौतों में बढ़ोतरी हुई है, हालांकि रिकवरी रेट पहले की तरह ठीक है। लेकिन तेजी से बढ़ते संक्रमण और रोगियों की संख्या से अस्पतालों में रोगियों की लाइनें लगने लगी है। मरने वाले रोगियों में वैक्सीनेशन वाले व्यक्ति भी है। यानि ओमीक्रॉन से दो दो डोज लेने वाले व्यक्ति भी संक्रमित हो रहे हैं और समय पर ईलाज नहीं लेने के कारण उनकी मौतें भी सामने आ रही है। प्रदेश में कोरोना से मौतें चिन्ताजनक है। ऐसे हालात में सरकार को चाहिए कि कोविड नियमों की पालना सख्ती से करवाए। सरकार के मुखिया एक तरफ तो कोरोना की तीसरी लहर के बारे में चेताते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देते है, वहीं दूसरी तरफ पाबंदियों में छूट देने में लगे है। जो समझ से परे है। गुरुवार को सरकार ने शादी समारोह में मेहमानों की संख्या पचास से बढ़ाकर सौ कर दी। वीकेंड कफ्र्यू को शहरी सीमा तक सीमित कर दिया यानि शहरी क्षेत्र के बाहर कफ्र्यू नहीं रहेगा। यह निर्णय ठीक नहीं है। वह तब जब ग्रामीण क्षेत्रों में भी ओमीक्रॉन तेजी से फैल रहा है। स्कूली बच्चे व टीचर तक संकमित हो चुके हैं और तेजी से मामले बढ़ रहे है। ऐसे हालात में किसी भी तरह की छूट देना संक्रमण की गति को बढ़ाने वाला होगा। सरकार को इस वक्त सख्ती दिखाने की जरुरत है ना कि किसी के दबाव में पाबंदियों में छूट देने की। जनता को भी चाहिए कि वह सरकार की ओर से जारी कोविड नियमों की पालना करें और किसी भी तरह की लापरवाही ना बरतें।

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