Bogus registry

जयपुर। आपराधिक षड्यंत्र रच कर दूसरे के प्लाट को हडपने के लिए अपनी पत्नी को ही फर्जी महिला बना कर अपने पक्ष में रजिस्ट्री कराने एवं फर्जी रजिस्ट्री से एक निजी कंपनी से ऋण लेने के मामले में एसीएमएम-2 जयपुर मेट्रो ने शनिवार को एक दम्पती को 7 साल की जेल एवं 42,2०० रुपए का जुर्माना तथा फर्जी रजिस्ट्री में गवाह बने दो अभियुक्तों को 3 साल की जेल एवं 15,2०० रुपए के जुर्माने की सजा से दण्डित किया है। कोर्ट ने अभियुक्त डेरिक लारेन्स (52), उसकी पत्नी इशरत स्कोट (38) निवासी 15 डी, कबीर कोलोनी, सुशीलपुरा-सोडाला एवं गवाह बने दर्शन कुमार शर्मा (39) निवासी जमुनाडेयरी-गोविन्दपुरी, सोडाला तथा विजय कुमार मीणा निवासी रावलजी का बंधा-राकडी, सोडाला को सजा सुनाई। मामले में डेरिक लारेन्स 16 दिसम्बर, 2०14 से एवं इशरत स्कोट 24 दिसम्बर, 2०14 से निरन्तर जेल में है। अन्य दोनों आरोपी जमानत पर आजाद है।
यह है मामला:-
बृजमण्डल कोलोनी-झोटवाडा निवासी लक्ष्मीनारायण ने कोर्ट के आदेश से 1 अक्टूबर, 2०14 को थाने में मुकदमा दर्ज कराया था कि गुलाबबाडी भवन निर्माण सहकारी समिति ने 65 वर्षीय कलावती देवी को 12 जनवरी, 1988 को बृजमण्डल कोलोनी में जमीन आवंटन किया था। जिसका 2 जून, 2०11 को जेडीए ने पट्टा जारी किया एवं 2 अप्रेल, 2०12 को उसने क्रय कर लिया। कुछ दिनों बाद दीवान हॉउसिंग फाईनेंस कार्पोरेशन वाले प्लाट पर आये और कागजात गिरवी रख कर 15,54,612 रुपए का लोन लेना बताया। ऋणी डेरिक लारेन्स ने 29 अक्टूबर, 2०1० को सब रजिस्ट्रार-5 के समक्ष करवाई गई रजिस्ट्री पेश की थी। उसने ऋण की 28 किश्ते भी चुकाई थी। बाद जांच पता चला कि डेरिक लारेन्स ने अपनी पत्नी इशरत स्कोट को आवंटी कलावती बनाकर अपने नाम रजिस्ट्री करा ली।
जवाब मांगते कई सवाल:-
दम्पती ने 2०1० में ही फर्जी रजिस्ट्री करा ली, तो जमीन पर कब्जा क्यों नहीं किया या केवल लोन के लिए दस्तावेज बनाये थ्ो, तो लोन की 28 किश्तें क्यों जमा कराई गई। फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने पर कलावती ने एफआईआर दर्ज नहीं करवाकर परिवादी को क्यों बेच दिया।

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