दिल्ली। केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्री मेनका संजय गांधी ने स्कूलों से शारीरिक दंड समाप्त करने के लिए दिये गये दिशा-निर्देशों का सख्ती से अनुपालन करने का अनुरोध किया है। ऐसा अभी हाल में एक स्कूल में अपना होमवर्क पूरा नहीं करने पर स्कूल छात्राओं को पीड़ादायक शरीरिक दंड दिये जाने की चिंतित करने वाली घटना को ध्यान में रखते हुए किया है। महिला और बाल विकास मंत्रालय के अधिकार वाले राष्ट्रीय बाल अधिकारी संरक्षण आयोग ने स्कूलों में शारीरिक दंड को समाप्त करने के लिए दिशा-निर्देश तैयार करके जारी किए हैं। मानव संसाधन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को लिखे गए पत्र में मेनका संजय गांधी ने उत्तर प्रदेश के एक स्कूल में चिंतित करने वाली शारीरिक दंड देने की घटना के बारे में चिंता व्यक्त की है। मेनका संजय गांधी ने कहा कि आरटीई एक्ट की धारा 17 के तहत शारीरिक दंड दिये जाने पर प्रतिबंध है। उन्होंने मानव संसाधन मंत्री से अनुरोध किया कि सरकारी तथा निजी स्कूलों को निर्देश दिये जायें कि वे दिये गये दिशा-निदेर्शों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करें।

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