जयपुर । राजस्थान विश्वविद्यालय में 22 साल पहले 1996 में बी.कॉम प्रथम वर्ष की परीक्षा में फेल एक छात्र से मिलीभगत कर पुनर्मूल्यांकन में आए अंकों में कांट-छाट कर उसे पास करने के अपराध में भ्रष्टाचार मामलों की विशेष अदालत क्रम.दो में जज पवन कुमार शर्मा ने अभियुक्त एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी चंद पहाड़िया निवासी जहाजपुर.भीलवाड़ा को 2 साल जेल की सजा से दण्डित किया है। डॉ. पहाडिया पुनर्मूल्यांकन समिति का संयोजक था। मामले में लाभार्थी छात्र रिपुदमन सिंह राजावत को कोर्ट ने सन्देह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

एसीबी को सूत्रों से सूचना मिली कि राजस्थान यूनिवर्सिटी में पुनर्मूल्यांकन में अनियमितता हो रही है। शिकायत सही पाए जाने पर एसीबी ने 23 जून 1997 को एफआईआर दर्ज की। बी.कॉम पार्ट प्रथम का 6 जुलाई 1996 को परिणाम जारी हुआ। छात्र राजावत ने 19 जुलाई को दो पेपरों का पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया। एसोसिएट प्रोफेसर नाथूलाल ने पेपर प्रथम में 21 अंक दिए तथा सुरेन्द्र सिंह ने द्बितीय पेपर में 2० अंक प्रदान किए। आरोप है कि पहाड़िया ने 21 को 32 व 2० को 4० अंक कर उसे उत्तीर्ण कर दिया।

लिपिक रामखिलाड़ी ने इन्द्राज कर समिति के सदस्य श्यामलाल सिंह शेखावत व कन्हैयालाल शर्मा को भिजवा दिए। दोनों ने स्टेटमेंट चेक कर हस्ताक्षर कर दिए एवं संयोजक को दे दिया। टीआर में करेक्शन करवा कर 27 जनवरी 1997 को नई अंक तालिका जारी कर दी गई थी। सिंडिकेट की स्वीकृति के बाद तत्कालीन उप कुलपति कान्ता आहूजा ने पहाड़िया के खिलाफ 28 सितम्बर 1999 को ही मुकदमा चलान के लिए अभियोजन स्वीकृति दे दी थी। एसीबी ने 5 अपे्रल 2००5 को कोर्ट में चालान पेश किया था। मामले में गवाह परिवादी तत्कालीन एएसपी आर.के. धनाका, राम प्रसाद दुसाद, भगवान सहाय पारीक की तो गवाही से पहले ही मौत हो गई। गवाह अर्थशास्त्र के सहाचार्य कन्हैयालाल शर्मा व एलडीसी कैलाश नारायण गुप्ता के समन तो एसीबी ने अदम पता बताते हुए तामील ही नहीं करा सकी।

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