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जयपुर। जगद्गुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनोद शास्त्री के कार्यकाल समाप्ति 13 फरवरी से पूर्व मंगलवार को शिक्षक संघ ने महामहिम कुलाधिपति/राज्यपाल तथा किरण माहेश्वरी, संस्कृत शिक्षा मंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर प्रो. शास्त्री के कार्यकाल के दौरान हुए भ्रष्टाचार की विस्तृत जांच की मांग की है। संघ अध्यक्ष डॉ. माताप्रसाद शर्मा ने मंगलवार को कहा कि प्रो. विनोद शास्त्री ने अपने कुलपति कार्यकाल में वित्तीय, प्रशासनिक तथा अकादमिक भ्रष्टाचार करके विश्वविद्यालय के मान-सम्मान का भारी नुकसान किया है। प्रो. शास्त्री ने विश्वविद्यालय में विशेषाधिकारी जैसे अनावश्यक पदों का सृजन कर सरकारी धन का जमकर दुरुपयोग किया है। विवादों को बढ़ाने के साथ ही कुलपति ने पूर्वाग्रह ग्रस्त होकर शिक्षकों, अधिकारियों, कर्मचारियों तथा छात्र-छात्राओं पर निराधार एवं विधिविरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही कर विश्वविद्यालय का माहौल खराब किया है। इस कारण विश्वविद्यालय में संस्कृत पढ़ने वाले छात्रों की संख्या घटकर मात्र 268 रह गई है।

भ्रष्टाचार करने के लिए प्रो. शास्त्री ने विश्वविद्यालय अधिनियम तक का उल्लंघन करते हुए संविधान और सरकार दोनों का अपमान किया है। शिक्षक संघ इसकी विस्तृत शिकायत महामहिम राज्यपाल तथा संस्कृत शिक्षा मंत्री से कर इनके कार्यकाल की जांच की मांग कर रहा है। विश्वविद्यालय की बदहाली के कारण शिक्षक संघ ने कुलपति के सम्मान में किसी प्रकार के विदाई समारोह का आयोजन नहीं किया। यह शर्मनाक है कि विश्वविद्यालय का निर्धारित समय सायं 5 बजे के बाद कुलपति ने कुछ कर्मचारियों से अपना स्वागत-सत्कार करवाया है। जबकि संघ पूर्व में ही प्रो. शास्त्री के सम्मान समारोह का विरोध कर रहा था। संघ ने निर्णय लिया है कि नवनियुक्त कुलपति प्रो. आर.के. कोठारी का विश्वविद्यालय में भव्य स्वागत किया जाएगा तथा विश्वविद्यालय में छात्रों की संख्या बढ़ाने के लिए प्रयास किए जाएंगे।

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