जयपुर. राजस्थान की लोक संस्कृति एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी अलग छाप छोड़ने जा रही है। राजस्थान के प्रसिद्ध लोक कलाकार रहीस भारती और धोद बैंड को फ्रांस की राजधानी पेरिस में 18 जून को आयोजित होने वाले प्रतिष्ठित ‘बोंजूर मोदी’ कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के लिए आमंत्रित किया गया है। यह कार्यक्रम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सम्मान में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें भारतीय संस्कृति, प्रवासी भारतीय समुदाय और भारत-फ्रांस संबंधों का उत्सव मनाया जाएगा। पेरिस के ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित साल प्लेयल कॉन्सर्ट हॉल में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में धोद बैंड राजस्थान की लोक कला, संगीत और नृत्य की रंगारंग प्रस्तुति देगा। खास बात यह है कि बैंड का चयन भारतीय दूतावास, पेरिस द्वारा आधिकारिक रूप से किया गया है, जिसे राजस्थान और भारतीय लोक संस्कृति के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ‘बोंजूर मोदी’ कार्यक्रम में धोद बैंड का बहुरंगी कलाकार दल भारतीय लोक संस्कृति की विविध परंपराओं को मंच पर जीवंत करेगा। प्रस्तुति का नेतृत्व रहीस भारती (तबला वादक) करेंगे। उनके साथ मोइनुद्दीन खान (गायन एवं हारमोनियम), सुशीला (राजस्थानी लोक नृत्य), जापान की कलाकार कोको आयुमी (राजस्थानी नृत्य), बाबू खान (लोक गायन), अफरीदी भारती (तबला), अब्दुल सत्तार खान एवं सिकंदर मिरासी (ट्रॉम्बोन), अयूब (ट्रम्पेट), मोहम्मद रमजान (डुगा), जाकिर (टैम्बोर), तनवर लाल (अल्फोनियम), इमरान लंगा (करताल एवं गायन) और इकबाल खान (ढोलक) अपनी प्रस्तुति देंगे।इन दिनों रहीस भारती एवं धोद बैंड अपने यूरोप टूर-2026 पर हैं। इस दौरान फ्रांस सहित कई यूरोपीय देशों के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक समारोहों और संगीत महोत्सवों में वे भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। बैंड में राजस्थान के दूर-दराज गांवों से जुड़े करीब 20 लोक कलाकार शामिल हैं, जो लोक संगीत और नृत्य के माध्यम से विदेशी दर्शकों को भारतीय संस्कृति से रूबरू करा रहे हैं। पिछले 26 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय रहीस भारती और उनका धोद बैंड दुनिया के 119 से अधिक देशों में प्रस्तुति देकर भारतीय लोक संस्कृति का परचम लहरा चुका है। राजस्थान की मिट्टी से निकला यह दल आज वैश्विक स्तर पर भारतीय सांस्कृतिक पहचान का मजबूत प्रतिनिधि बन चुका है। रहीस भारती हर वर्ष लगभग छह से सात महीने विदेशों में रहकर भारत और राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का प्रचार-प्रसार करते हैं। उनके प्रयासों से अब तक 700 से अधिक लोक कलाकारों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल चुका है। धोद बैंड के माध्यम से राजस्थान की कई पारंपरिक लोक कलाओं और समुदायों को विश्व स्तर पर पहचान मिली है। इनमें लंगा, मांगणियार, कालबेलिया, ढाढ़ी, दमामी, राणा समुदाय के कलाकारों के साथ-साथ पारंपरिक ब्रास बैंड कलाकार भी शामिल हैं। रहीस भारती का मानना है कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। यही कारण है कि वे वर्षों से इन परंपराओं को विश्व मंच तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहे हैं।

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