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नयी दिल्ली : 2016 के सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एसआरएस) के हाल ही में जारी बुलेटिन के अनुसार भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में महत्वपूर्ण तरीके से कमी आई है। भारत में पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर (यू5एमआर) में नौ प्रतिशत की अच्छी खासी गिरावट दर्ज की गयी है। 2015 में यह दर 43 प्रति हजार थी जो 2016 में घटकर 39 प्रति हजार हो गयी। स्वास्थ्य मंत्रालय की विज्ञप्ति के अनुसार देश में पहली बार पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत के मामलों की संख्या दस लाख से कम दर्ज की गयी है। 2015 के आंकड़े की तुलना में 2016 में इसमें 1,20,000 की कमी आई।

कई राज्यों ने इस दर में कमी लाने में अच्छी प्रगति की है। हालांकि छत्तीसगढ़, दिल्ली और उत्तराखंड में 2016 में इससे पिछले साल की तुलना में मृत्युदर थोड़ी बढ़ गयी। वहीं, तेलंगाना में स्थिति जस की तस रही। इस सफलता से जुड़े सभी पक्षों को बधाई देते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि परिणाम दर्शाता है कि इस मामले में सरकार के रणनीतिक प्रयासों के लाभ मिल रहे हैं और कमजोर प्रदर्शन वाले राज्यों पर ध्यान देने का सकारात्मक परिणाम मिल रहा है। उन्होंने कहा कि भारत टिकाऊ विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत 2030 तक पांच साल से कम आयु के बच्चों की मृत्युदर को 25 के स्तर पर लाने के लक्ष्य को पाने की दिशा में बढ़ रहा है।

प्रधान न्यायाधीश के बाद दूसरे सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर ने कहा, ‘‘कभी-कभी उच्च्तम न्यायालय के प्रशासन व्यवस्था में सब कुछ ठीक नहीं होता और पिछले कुछ महीनों में ऐसी अनेक चीजें हुयी हैं जो अपेक्षा से कहीं नीचे हैं।’’ संवाददाता सम्मेलन में मौजूद अन्य न्यायाधीशों में न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एमबी लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ थे।

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