Big tendar scam-phed rajasthan
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जयपुर। साढ़े तीन करोड़ रुपए के एक सौ आठ एंबुलेंस घोटाले के मामले में समर्पण करने वाली आरोपी जिगित्सा हेल्थ केयर लिमिटेड की सीईओ श्वेता मंगल की जमानत अर्जी पर बुधवार को सुनवाई हुई। श्वेता मंगल ने मंगलवार को सीबीआई मामलात की विशेष अदालत में सरेंडर किया था और जमानत अर्जी पेश की थी। सुनवाई के दौरान सीबीआई के वकील नहीं होने पर जमानत अर्जी पर सुनवाई नहीं हो सकी। बुधवार को सुनवाई होने के कारण कोर्ट ने श्वेता मंगल को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया। बुधवार को सुनवाई के बाद ही कोर्ट ने जमानत पर छोड़ने के आदेश दिए।
गौरतलब है कि कोर्ट ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री वायलर रवि के पुत्र रवि कृष्णा, पूर्व केन्द्रीय मंत्री एलेक्स एंटोनी के पुत्र अमित एंटोनी, श्वेता मंगल, मैसर्स जिकित्सा हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक को वारंट से बुलाया है। मामले में अगली तारीख 23 अगस्त है। चारों आरोपियों के खिलाफ सीबीआई ने 4 जून को अदालत में चालान पेश कर पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री के पुत्र कार्ति पी. चिदम्बरम, पूर्व सीएम अशोक गहलोत, एनआरएचएम के तत्कालीन निदेशक, तत्कालीन चिकित्सा मंत्री दुर्रु मियां सहित अन्य के खिलाफ जांच धारा 173(8) में लम्बित रखी थी। चारों आरोपियों को सीबीआई ने अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है। मामले के परिवादी पूर्व मेयर पंकज जोशी के एडवोकेट ए.के.जैन कोर्ट में श्वेता मंगल की जमानत अर्जी का विरोध करेंगे।
गौरतलब है कि पंकज जोशी ने 31 जुलाई 2013 को अशोक नगर थाने में परिवाद पेश कर आरोप लगाया था कि कम्पनी ने एम्बुलेंस के फेरों के फर्जी बिल बनाकर राजकोष को साढ़े तीन करोड़ रुपए की चपत लगाई। जयपुर पुलिस ने मामला दर्ज किया। बाद में सीबीआई ने 24 अगस्त, 2015 को मुकदमा दर्ज कर जांच में पाया कि धन्वंतरी सेवा योजना में 108 एंबुलेंस सेवा पीपीपी मॉडल पर गैर लाभकारी संगठन ईएमआरआई हैदराबाद से 23 मई, 2008 को समझौता बी. रामलिंगाराजू से हुआ था। जनवरी 2009 में सत्यम घोटाला होने से कम्पनी घाटे में चली गई। 7 अपै्रल 2010 को सरकार, जिगित्सा और आईसीईटी नीदरलैंड के बीच समझौता हुआ। आरोप है कि अमित एंटोनी ने 9 नवंबर, 2009 के संयुक्त बोली समझौते एवं बैंक गारंटी के नकदीकरण के संबंध में 28 जनवरी, 2010 के पत्रों पर आईसीईटी के प्रतिनिधि सुब्रतो दास के फर्जी हस्ताक्षर किए थे। शर्त के अनुसार 20 करोड़ का वार्षिक कारोबार नहीं करने कारण जिगित्सा अपात्र कम्पनी थी। सीबीआई ने जांच में यह भी माना कि रवि कृष्णा ने निदेशक के पद पर रहने का पचास लाख का वेतन लिया। संचालन संभाल रही श्वेता मंगल ने 2010 से 2013 में करीब सवा करोड़ रुपए का वेतन लिया। अमित एंटोनी ने राजकोष को 62 लाख की हानि पहुंचाई।

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