Benifits for farmer
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– राजभवन ने कहा, रोडा बिल सरकार ने भेजा नहीं। पीसीसी चीफ ने कहा अफसरों ने गलत जानकारी दी राज्यपाल को। रोडा बिल नहीं सिविल प्रक्रिया संहिता संशोधन विधेयक भेजा है।
जयपुर। किसानों की जमीन नीलाम नहीं करने वाले एक्ट रोडा (जमीन नीलामी रोधी एक्ट) को लेकर राज्य सरकार और राजभवन में तकरार बढ़ गई है। राज्य सरकार का कहना है कि किसानों की जमीन नीलाम ना हो, इसके लिए बिल का प्रारुप मंजूरी के लिए राज्यपाल को भेज रखा है। दूसरी तरफ राजभवन कार्यालय का कहना है कि राज्य सरकार ने इस तरह का कोई बिल नहीं भेजा है। सरकार और राजभवन के बीच बिल को लेकर बयानबाजी के बीच पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने सोमवार को पीसीसी में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि सरकार की ओर से रोडा एक्ट के बजाय सिविल संशोधन विधायक 2020 भेजा है। जमीन नीलामी रोधी एक्ट दीवानी प्रक्रिया संहिता में संशोधन बिल है। 24 नवंबर, 2020 को राज्य सरकार ने संशोधित बिल राजभवन को भेजा गया। आज तक यह बिल मंजूर नहीं किया गया है और ना ही यह बिल लौटकर सरकार के पास आया है। डोटासरा ने यह भी कहा कि राजभवन के अधिकारियों ने गवर्नर कलराज मिश्र को गलत जानकारी दी है।  जब तक यह बिल पास नहीं होगा तब तक किसानों को जमीन की नीलामी को रोक पाना मुश्किल है। राज्यपाल से आग्रह है कि इस बिल को जल्द मंजूरी दें ताकि किसानों को राहत मिल सके। डोटासरा ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार को किसानों से कोई मतलब नहीं है और ना ही किसानों के हित में कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री को तो विचित्र वेशभूषा पहनकर भाषण देना आता है। राजस्थान की कांग्रेस सरकार की किसानों के हित में साफ मंशा है कि किसानों की जमीनों की नीलामी ना हो, इसलिए यह बिल लाया गया है, ताकि किसानों की  पांच एकड़ जमीन की नीलामी ना हो सके। डोटासरा ने यह भी कहा कि भाजपा के नेता आपसी लड़ाई में है। वे सभी सीएम बनने के लिए लड़ रहे हैं। भाजपा नेता सिर्फ बयानबाजी कर रही है। इनके आंदोलन दिखावा है। विपक्ष के तौर पर भाजपा नाकाम रही। प्रदेश प्रभारी अजय माकन पंजाब चुनाव में व्यस्त होने के कारण संगठन विस्तार का काम लंबित है। वे जैसे ही फ्री होंगे, संगठन विस्तार का काम शुरु हो जाएगा।

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