-विधानसभा चुनाव में हार के बाद कांग्रेस विधायक दल की बैठक में पर्यवेक्षकों ने लिया फीडबैक
जयपुर. विधानसभा चुनावों में हार के बाद कांग्रेस विधायक दल की पहली बैठक आज पार्टी मुख्यालय में हुई। इसमें नेता प्रतिपक्ष का फैसला आलाकमान पर छोड़ने का प्रस्ताव पारित किया गया। बैठक में पार्टी के सभी विधायक शामिल हुए। इस दौरान तीनों पर्यवेक्षकों ने वन टू वन फीडबैक लिया। रामगढ़ से कांग्रेस विधायक और पूर्व राष्ट्रीय सचिव जुबैर खान ने कांग्रेस की हार को लेकर सवाल उठाए हैं। बैठक में पार्टी की अगली रणनीति पर मंथन होने के साथ हार से जुडे़ मुद्दों पर चर्चा हुई। चुनाव में भितरघात का मुद‌्दा भी उठा। हार के लिए वरिष्ठ नेताओं की जिम्मेदारी तय करने की मांग की गई। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में सचिन पायलट के समर्थकों ने नारेबाजी की। बैठक के बाद निवर्तमान सीएम अशोक गहलोत ने कहा मेरी भूमिका पार्टी के साधारण कार्यकर्ता के रूप में रहेगी। वहीं, सचिन पायलट ने कहा हमें कमियों को स्वीकार कर सुधार करना होगा। युवाओं को आगे लाना चाहिए। भूतकाल की बातें छोड़कर भविष्य की बात करनी है।
-अशोक गहलोत बोले हमारा वोट शेयर कम नहीं हुआ
अशोक गहलोत ने कहा नेता प्रतिपक्ष को लेकर एक सिंगल लाइन का प्रस्ताव पारित किया गया है। हमने फैसला हाईकमान पर छोड़ा है। हमारे यहां यह परिपाटी रही है। हमारा वोट शेयर कम नहीं हुआ। पहले जो वोट शेयर था, वही आया है। लेकिन, हमारे जो निर्दलीय जीते हुए थे, उनका वोट शेयर बीजेपी की तरफ चला गया। हमने विकास और लोकल मुद्दों पर चुनाव लड़ा। बीजेपी ने यह चुनाव अलग तरीके से लड़ा। उन्होंने विकास की बात नहीं की। कन्हैया लाल को लेकर चुनाव लड़ा। राजस्थान में तरह-तरह की अफवाह फैलाई गई। गहलोत ने कहा मेरा मानना था कि सरकार बन जाएगी। प्रदेश में सरकार के खिलाफ लहर नहीं थी। राजस्थान वह राज्य था, जहां सरकार के खिलाफ माहौल नहीं था। जबकि होता यह है कि जहां सरकार होती है, वहां बहुत कुछ सरकार के खिलाफ हो जाता है। भाजपा ध्रुवीकरण करने में सफल हुई। उन्होंने कहा हमें हारने की उतनी चिंता नहीं, जितनी इस बात की है कि देश में क्या होगा। देश में ज्यूडिशियरी की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। देश का लोकतंत्र किस दिशा में जा रहा है, यह सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा- मैंने बैठक में सुझाव दिया है कि लोकसभा के लिए उम्मीदवार की तलाश अभी से हो। मेरा कार्यकर्ताओं से आह्वान है कि वे लोकसभा चुनाव की तैयारी करें।
-पायलट ने कहा लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी करनी होगी
विधायक दल की बैठक के बाद सचिन पायलट ने कहा लोकसभा चुनाव के लिए अभी से तैयारी करनी होगी। हमें उम्मीद थी कि राजस्थान में इस बार सरकार दोबारा बनेगी, सब लोगों ने मेहनत की। इसके बावजूद कुछ कमियां रहीं। इन कमियों को स्वीकार करना पड़ेगा। क्या कमियां रहीं और कामयाबी के लिए क्या सुधार हो, इस पर लंबी चर्चा की जरूरत है। पायलट ने कहा आने वाले समय में कांग्रेस मजबूती के साथ कैसे विकल्प बन सकती है, इस बारे में रणनीति तय करनी है। कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता अगर जनता का मन जीत लेते तो चुनाव जीत पाते। उन्होंने कहा- राजस्थान की पुरानी परंपरा है कि सत्ता बदलती है। हमारा प्रयास था कि हम सत्ता में वापसी करें। अभी भी हम मजबूती से जनता की आवाज बनकर जनता के बीच में रहेंगे और मेहनत करेंगे। उन्होंने कहा- पार्टी जल्दी निर्णय लेगी कि आगे किस तरह से रास्ता तय किया जाएगा। मैं हमेशा से युवाओं के पक्ष में रहा हूं। युवाओं को आगे लाना चाहिए और मुझे खुशी है पार्टी ने इस चुनाव में ऐसा किया है।
-जुबैर खान ने कहा कार्यकर्ताओं की जगह एजेंसियों को महत्व देने से हारे
जुबैर खान ने कहा हमारी योजनाओं को हम नीचे के स्तर पर नहीं पहुंचा पाए, इसलिए चुनाव हारे। पार्टी की असली मजबूती होता है कार्यकर्ता। अगर कार्यकर्ता की जगह एजेंसियों को महत्व दिया जाएगा तो उसका नुकसान होगा। हवामहल से जीते भाजपा के बालमुकुंद आचार्य के कल मीट की दुकान हटाने को लेकर कहा कि यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं है। हम इसी मिट्टी में पैदा हुए हैं, हमें न सिखाएं। कांग्रेस की हार को लेकर अशोक गहलोत और सचिन पायलट खेमों के बीच गुटबाजी फिर तेज होने के आसार बन गए हैं। पायलट ने सोमवार को इसके साफ संकेत भी दिए। पायलट ने जिस अंदाज में हार को लेकर सवाल उठाए हैं, उससे इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि आगे गुटबाजी फिर तेज होगी। कांग्रेस विधायक दल की बैठक से एक दिन पहले सचिन पायलट ने हार पर सवाल उठाते हुए इस पर मंथन करने का मुद्दा उठाया था। पायलट ने कहा था- हम लोग चाहते थे कि सरकार दोबारा बने। इसके लिए हम सब लोगों ने जितना हो सके, पूरी ताकत लगाकर उतना काम किया। फिर भी हम कामयाब नहीं हो सके। इसके कारणों को तलाशना होगा। जिस परंपरा को तोड़ने के लिए हमने बहुत मेहनत की, हरसंभव कोशिश करने के बावजूद भी हम कामयाब नहीं हो सके। निश्चित रूप से यह चिंता का विषय है। हर बार हम सरकार बनाने के बाद उसे रिपीट नहीं कर पाते हैं। इस बार दोबारा वही हुआ, इस बात का खेद हम सबको है। इस पर हमें आत्मचिंतन करना पड़ेगा। हर स्तर पर कहां कमी रही, क्या वह कारण थे जिसकी वजह से हम सरकार दोबारा नहीं बना पाए।

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