जयपुर। बिहार के राज्यपाल रामनाथ कोविंद को एनडीए ने राष्ट्रपति पद के लिए अपने उम्मीदवार के तौर पर घोषित किया है। रामनाथ कोविंद दलित नेता होने के साथ ही कानून के जानकार भी है। रामनाथ कोविंद का जन्म कानपुर देहात की डेरापुर तहसील के गांव परौंख में हुआ। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वकालत से अपने करियर की शुरुआत की। वर्ष 1977 में जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद वे तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। इसके बाद भाजपा नेतृत्व के सपर्क में आए।

-घाटमपुर से लड़ा लोकसभा चुनाव
वर्ष 1990 में पार्टी ने कोविंद को घाटमपुर लोकसभा सीट से टिकट दिया, लेकिन वह चुनाव हार गए। फिर 1993 व 1999 में भाजपा ने उन्हें प्रदेश से 2 बार राज्यसभा में भेजा। पार्टी के लिए दलित चेहरा बने कोविंद अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रवक्ता भी रहे। घाटमपुर से चुनाव मैदान में उतरने के बाद से ही वे लगातार क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के संपर्क में रहे। 2007 में पार्टी ने उन्हें प्रदेश की राजनीति में सक्रिय करने के लिए भोगनीपुर सीट से चुनाव लड़ाया, लेकिन वह यह चुनाव भी हार गए। रामनाथ कोविंद प्रदेश अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीकांत बाजपेयी के साथ महामंत्री रहे।

-आईएएस परीक्षा में तीसरे प्रयास में मिली थी सफलता
रामनाथ कोविद की प्रारंभिक शिक्षा संदलपुर ब्लॉक के ग्राम खानपुर परिषदीय प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय हुई। कानपुर नगर के बीएनएसडी इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद डीएवी कॉलेज से बी. कॉॅम व डीएवी लॉ कालेज से विधि स्नातक की पढ़ाई पूरी की। दिल्ली में रहकर आईएएस की परीक्षा तीसरे प्रयास में पास की। लेकिन मुख्य सेवा के बजाय एलायड सेवा में चयन होने पर नौकरी ठुकरा दी। जून 1975 में आपातकाल के बाद जनता पार्टी की सरकार बनी तो वित्त मंत्री मोरारजी देसाई के निजी सचिव बने। जनता पार्टी सरकार में सुप्रीम कोर्ट के जूनियर काउंसलर के पद पर कार्य किया।
-पैतृक मकान को कर दिया दान
राज्यपाल रामनाथ कोविद के दो बड़े भाई प्यारेलाल व स्व. शिवबालक राम के बाद तीसरे नम्बर के सबसे छोटे हैं। परौख गांव में कोविद अपना पैतृक मकान बारातशाला के रूप में जनकल्याण के लिए दान कर चुके हैं।

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