Ashok Gehlot
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जयपुर। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अशोक गहलोत ने कहा है कि राज्य सरकार की लापरवाही और बजरी माफियाओं से उसकी मिलीभगत के परिणामस्वरूप राजस्थान में दो माह से बजरी खनन पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश से रोक लगी है और यह रोक कम से कम अगले डेढ़ माह तक तो और बनी ही रहेगी। इसके नतीजे में लाखों मजदूर बेरोजगार रहेंगे और राज्य का विकास भी ठप्प रहेगा।
श्री गहलोत ने आज अपने एक बयान में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने बजरी माफियाओं के साथ सरकार की मिलीभगत को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए दो माह पूर्व रोक लगाई थी और सरकार से जवाब मांगा था। दो दिन पूर्व सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब पर सर्वोच्च न्यायालय ने फिर से अपनी नाराजगी दिखाते हुए रोक को डेढ़ माह के लिए और बढ़ा दिया है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की इस लापरवाही के कारण प्रदेश के करीब 25 लाख से ज्यादा लोग बेरोजगार हो गये हैं जिनमें बजरी खनन में लगे मजदूर, बजरी ट्रक ड्राईवर, उनके मालिक, निर्माण मजदूर एवं कारीगर आदि शामिल हैं। इसके चलते लोगों के भवन निर्माण कार्य रुक गये हैं वहीं राजधानी जयपुर सहित प्रदेश में सरकार के सभी छोटे-बड़े प्रोजेक्ट भी अटक गये हैं। इसको लेकर आम जन में भी आक्रोश फैला हुआ है। उन्होंने कहा कि नागौर और बीकानेर में खनन जारी हैं लेकिन इन क्षेत्रों से प्रदेश भर की मांग को पूरा करना संभव नहीं है। जितनी सी बजरी उपलब्ध कराई जा रही है, उसके दाम भी दुगने-तिगने दाम वसूले जाने से लोगों की जेबें कट रही हैं। साथ ही राज्य सरकार को भी रोजाना करीब सवा करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
गहलोत ने कहा कि राज्य सरकार ने पूरी मशीनरी को फिलहाल बाड़मेर में प्रस्तावित प्रधानमंत्री के दौरे की तैयारियों में झोंक दिया है और जब तक उसकी नींद खुलेगी तब तक लोग यूं ही पिसते रहेंगे। पहले भी सरकार की लापरवाही की वजह से किसानों की आत्महत्या की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, उसे देखते हुए सरकार को पूरी गम्भीरता के साथ इस दिशा में कदम उठाने चाहिए।

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