जयपुर। वनस्थली विद्यापीठ को सिंधी कैंप बस स्टैंड के पास हॉस्टल के लिए 9 जनवरी, 1951 को 8,888 वर्गगज भूमि का आवंटन करने तथा विद्यापीठ के आवंटन की शर्तों की पालना नहीं करने पर जेडीए के आवंटित भूमि के आवंटन को निरस्त करने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में न्यायाधीश एम.एन. भंडारी की एकलपीठ ने सही एवं वैधानिक मानते हुए इस संबंध में दायर याचिका को खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि भले ही राज्य सरकार ने भी शर्तो की पालना नहीं की हो, लेकिन संस्था को आवंटित भूमि का अन्य प्रयोजन के लिए उपयोग करने की अनुमति अदालत के आदेश से नहीं दी जा सकती। याचिकाकर्ता विद्यापीठ को 1994 में मांग पत्र जारी किया गया था, लेकिन उसने राशि ही जमा नहीं कराई। 29 मई, 2०14 को जेडीए ने वनस्थली विद्यापीठ को नोटिस दिया था कि क्यों ना उपरोक्त भूमि का आवंटन रद्द कर दिया जाए। बाद में जेडीए ने 6 जून को भूमि का आवंटन रद्द कर दिया और भूमि की नीलामी निकाल दी गई। जेडीए न्यायाधीकरण में प्रकरण जाने पर न्यायाधीकरण ने प्रकरण में यथा-स्थिति के आदेश देते हुए मामले को वापस जेडीए को भेज दिया। इस आदेश के खिलाफ विद्यापीठ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। हाईकोर्ट ने सुनवाई के लिए मामला जेडीए न्यायाधीकरण को भेज दिया। न्यायाधीकरण ने 12 मई को अपील निरस्त कर दी। इस आदेश के खिलाफ विद्यापीठ ने फिर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। विद्यापीठ की दलील थी कि जेडीए की ओर से रुपान्तरण शुल्क तय नहीं करने के कारण वे जमा नहीं करा सके। उन्होंने तो भूमि का संस्थागत उपयोग की अनुमति मांगी थी, लेकिन जेडीए ने तो आवंटन ही रद्द कर दिया। जेडीए का कहना था कि विद्यापीठ को हॉस्टल के लिए भूमि दी गई थी, लेकिन वे व्यावसायिक उपयोग कर रहे थे। साथ ही भूमि पर दो साल में निर्माण करना था, लेकिन आज-तक हॉस्टल का निर्माण नही किया।

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