अजमेर। सिक्किम में 17 दिन पहले आई बाढ़ में राजस्थान का एक और जवान बह गया था। भारतीय सेना के मेडिकल कोर्स के जवान हनुमानराम जाट (29) वर्ष की पार्थिव देह 130 किलोमीटर दूर सिलीगुड़ी में मिली, जो अजमेर जिले के ग्राम अमरपुरा के रहने वाले थे। राष्ट्रभक्ति गीतों के बीच तिरंगा यात्रा निकालकर पार्थिव देह मंगलवार को पैतृक गांव अमरपुरा स्थित पंवारों की ढाणी पहुंची। सोमवार शाम करीब 6 बजे पार्थिव देह किशनगढ़ के मार्बल सिटी हॉस्पिटल में लाई गई थी। दोपहर दो बजे उनके पांच साल के बेटे ने उन्हें मुखाग्नि दी। मंगलवार सुबह गांव के बेटे को श्रद्धांजलि देने के लिए सैकड़ों लोगों का हुजूम उमड़ा। फूलों से सजे सेना के ट्रक से पार्थिव देह को सुबह करीब 9:30 बजे किशनगढ़ से उनके पैतृक गांव के लिए रवाना किया गया। इस दौरान भारतीय सेना के मेडिकल कोर्स के जवान शहीद हनुमानराम जाट को अंतिम विदाई देने के लिए रुपनगढ़ एसडीएम सुखाराम पिंडेल, विधायक सुरेश सिंह रावत, विकास चौधरी सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। पार्थिव देह को सुबह करीब 11 बजे घर से साढ़े तीन किलोमीटर दूर करकेड़ी गांव लाए और यहां से पंवारों की ढाणी तक तिरंगा यात्रा निकाली गई। घर पर अंतिम दर्शनों के साथ ही श्रद्धांजलि अर्पित की गई। 11 बजकर 46 मिनट पर पार्थिव देह को अंत्येष्टि के लिए ले जाया गया। तीन अक्टूबर की देर रात बादल फटने के बाद सीवी ग्रांड बारडांग के सीवीवाई क्षेत्र से हनुमानराम जाट अपने 23 साथियों के साथ लापता हो गए थे। हादसे के 17 दिन बाद 20 अक्टूबर को उनका पार्थिव देह घटना स्थल से करीब 130 किलोमीटर दूर तिस्ता नदी में मिली। शहीद हनुमानराम सेना के बारडांग स्थित एफडी हॉस्पिटल में सेवारत थे। वे आठ साल सात महीने पहले सेना में भर्ती हुए थे। शहीद के परिवार में पिता सुण्डाराम, माता सोनकी देवी, पत्नी लीला, बेटा यश चौधरी (5) और बेटी दीक्षिता चौधरी (1) है। एक छोटा भाई है, जो गांव में खेती करता है। परिजनों का कहना है कि उसकी बुआ के दो बेटों जितेन्द्र और महेन्द्र मुंडेल को सेना में देखकर हनुमानराम भी सेना में देशभक्ति का जज्बा रखता था। हनुमानराम करीब एक महीने पहले ही गांव आए थे। इस दौरान उन्होंने अपनी मां सोनकी देवी की आंखों का ऑपरेशन करवाया था। उनके वापस ड्यूटी जॉइन करने के 10 दिन बाद ही उनके लापता होने की सूचना आ गई। इससे परिवार में मायूसी छा गई। करीब 8 साल पहले उनकी शादी होने के बाद उनकी पत्नी लीला ही घर-परिवार को संभाल रही थी। सिक्किम में बादल फटने की घटना में सीकर के जवान सज्जन सिंह खींचड़, करौली के शिवकेश गुर्जर और बहरोड़ के भवानी सिंह शहीद हो चुके हैं। शिवकेश का शव सिक्किम से करीब 600 किलोमीटर दूर बांग्लादेश की सीमा में बंगाल की खाड़ी के पास मिला था। 20 अक्टूबर को रूपनगढ़ के हनुमानराम का शव सिक्किम से 130 किलोमीटर दूर सिलीगुड़ी में मिला था। बाढ़ को 20 दिन बीत जाने के बाद भी सेना का रेस्क्यू जारी है।

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