High Court responds to clean sweeper's job

जयपुर। जमीन हड़पने के लिए 15 जुलाई 1972 को मृत व्यक्ति के नाम से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के लिए 24 अप्रैल 2004 को झूठा शपथ पत्र बनाकर पेश करने के मामले में एसीजेएम-एक जयपुर जिला सोनल शुक्ला ने अभियुक्त भोलूराम रैगर निवासी कालवाड़-जयपुर को 3 साल की जेल एवं 20 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया है। इस संबंध में परिवादी मोहनलाल ने 17 फरवरी 2005 को इस्तगासे के जरिए कालवाड़ थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
परिवादी के एडवोकेट तेजपाल कुलरिया ने कोर्ट को बताया कि भूमिहीन होने पर 1961 में मोहनलाल के पिता प्रभात पुत्र छोटू के नाम से जमीन आवंटित हुई थी।

राजस्व कर्मियों ने रिकॉर्ड में गलती से प्रभात पुत्र डालू कर दिया। उपरोक्त त्रुटि का ज्ञान भोलूराम व धन्ना राम को हो गया और इसका नाजायज फायदा उठाने व परिवादी के पिता को कृषि भूमि से वंचित करने के लिए षड्यंत्र रच प्रभात पुत्र डालू व्यक्ति के नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने के लिए 23 जुलाई, 2004 को एक झूठा शपथ पत्र एकल खिड़की कलेक्ट्रेट जयपुर में तस्दीक करवाया था। उपरोक्त फर्जी शपथ पत्र को ग्राम सचिव सुरेन्द्र कुमार गौरा के समक्ष पेश कर फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त किया था। झूठे मृत्यु प्रमाण के आधार पर अभियुक्त ने न्यायालय एसीएम में तकासमे का दावा अपने ही परिवार के लोगों को पक्षकार बनाकर झूठा मुकदमा पेश कर दिया था। प्रभात पुत्र डालूराम रैगर नाम का व्यक्ति ना तो परिवादी के घर में और ना ही अभियुक्त के परिवार में कभी पैदा हुआ था। परिवादी ने वंशावली लिखने का पुश्तैनी कार्य करने वाले गौरीलाल जागा का शपथ पत्र भी कोर्ट में पेश किया।

इसी तरह हरकी पोड़ी हरिद्वार के पंडे रविन्द्र भारद्वाज का शपथ पत्र, कुसीर्नामा भी पेश किया। 1966 की आमेर विधानसभा की निर्वाचक नामावली, राशनकार्ड सहित अन्य दस्तावेज पेश कर यह साबित कर दिया कि कालवाड़ गांव में प्रभात पुत्र डालू नाम का कोई व्यक्ति अस्तित्व में नहीं रहा है। इस मामले में तत्कालीन एसएचओ भोपाल सिंह भाटी ने ना तो दस्तावेजों की एफएसएल जांच करवाई और ना ही अन्य दोषियों को मुल्जिम माना।

 

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