विज्ञापनों के नाम पर करोड़ों खर्च करती है फाइनेंस कंपनियां और बैंक मगर सुरक्षा का क्या?
जयपुर। पिछले हफ्ते जयपुर में दो बड़ी लूट की वारदात हुई जिससे सारा गुलाबी नगर सकते में आ गया। खासकर वह लोग जिन लोगों का पैसा और गहने उन बैंकों में या फाइनेंस कंपनी में थे। इन दोनों लूट की वारदात में ध्यान देने वाली बात यह थी कि दोनों ही वारदातों में अपराधियों ने काफी समय वारदात की जगह बिताया तथा लोगों को बंदुक की नौक पर बंदी भी बनाया और बड़े आराम से अपनी वारदात को अंजाम देकर चलते बने। पुलिस तो घटना घटने के बाद आनी ही थी मगर शहर के व्यस्ततम इलाकों में इतनी आसानी से लूट होने के बाद किसी ने उन्हें भागते हुए भी नहीं देखा ना ही कोई उन्हें पहचान सका। सवाल यह है कि यह बैंक और कंपनिया टीवी, और अखबारों में और वेबसाईटों पर करोड़ों रुपए के विज्ञापन प्रसारित करती है लेकिन सूरक्षा के नाम पर वह सिर्फ एक गार्ड को गेट पर बिठा देते हैं जिसके पास एक दो नाली की बंदुक होती है। वह भी उसे चलानी ही आए जरूरी नहीं है वह सिर्फ दिखाने के लिए भी हो सकती है। पुलिस को तो आकर जांच करनी ही है मगर बैंक प्रबंधन का दायित्व नहीं बनता कि वह लोगों की गाढ़े पसीने की कमाई की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई पुख्ता इंतजाम करे। सिर्फ एक गार्ड बैठाने से और अलार्म लगाने से उनका दायित्व पूरा हो जाता है उन्हें चाहिए की उनकी सूरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी हो कि कोई भी अपराधी उसे लूटने का प्रयास करने से पहले सौ बार सोचे आजकल इतनी हाईटेक टैक्नोलॉजियां आ रही है क्या बैंक और ये फाईनेंस कंपनियां इनका इस्तेमाल सुरक्षा के लिए नहीं कर सकती है। जब इतने पैसे विज्ञापनों पर खर्च किए जा रहे हैं तो सुरक्षा व्यवस्था के लिए भी इनकी जिम्मेदारी बनती है कि इस पर भी कुछ धनराशि खर्च की जाए जिससे की भविष्य में कभी ऐसी वारदात ना हो और जिससे लोगों की मेहनत की कमाई को कोई अपराधी लूट कर न ले जाए और वह बेचारा तमाशा देखता ना रहे।

जेटली क्रूक कहने के लिए मंैने नहीं कहा था : केजरीवाल
नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और अन्य के खिलाफ मानहानि के एक मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय को सोमवार को बताया गया कि केजरीवाल ने अपने वकील राम जेठमलानी को केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के खिलाफ आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने का निर्देश नहीं दिया था। केजरीवाल ने एक शपथ-पत्र पेश कर उच्च न्यायालय से कहा, ससम्मान यह अवगत कराया जाता है कि न तो केजरीवाल ने और न ही वरिष्ठ वकील जेठमलानी के सहायक वकीलों ने उन्हें 17 मई, 2017 की सुनवाई के दौरान आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया था। यहां तक कि केजरीवाल ने जेठमलानी को एक पत्र लिखकर अपना वह दावा वापस लेने के लिए कहा है, जिसमें जेठमलानी ने अदालत को बताया था कि उन्होंने 17 मई को संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष सुनवाई के दौरान केजरीवाल के निर्देश पर आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल किया था। जेठमलानी ने 17 मई की सुनवाई के दौरान जेटली के लिए ‘धोखेबाज’ शब्द का इस्तेमाल किया था। जेटली ने दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (डीडीसीए) मामले में केजरीवाल और आम आदमी पार्टी (आप) के पांच अन्य नेताओं के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का मानहानि का दावा किया है। सोमवार को केजरीवाल ने ऐसे समय में यह शपथ-पत्र दाखिल किया है, जब जेटली ने मामले में गवाहों की रिकॉर्डिग निष्पक्ष और व्यवस्थित तरीके से तेजी से करने के लिए आवेदन डाला है। जेटली ने अपने आवेदन में कहा है, केजरीवाल के निर्देश पर जेटली से जिरह के दौरान ढेरों असंगत एवं अपमानपूर्ण सवाल पूछे गए तथा अपमानजनक एवं मानहानि वाले बयान दिए गए। जेटली ने दिसंबर, 2015 को केजरीवाल के अलावा आप नेताओं कुमार विश्वास, आशुतोष, संजय सिंह, राघव चड्ढा और दीपक वाजपेयी के खिलाफ डीडीसीए भ्रष्टाचार मामले में झूठे और अपमानजनक बयान देने के लिए मानहानि का मुकदमा किया है। मामले की सुनवाई के दौरान जेठमलानी द्वारा जेटली के लिए ‘धोखेबाज’ शब्द का इस्तेमाल करने के बाद जेटली ने केजरीवाल के खिलाफ 10 करोड़ रुपये का एक और मानहानि का दावा कर दिया।

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