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जयपुर । सेवारत चिकित्सक संघ की संयुक्त सचिव डॉ. आशा लता का कार्य नहीं करने पर 23 नवम्बर को फोन पर आरएएस अधिकारी एवं अतिरिक्त निदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं गिरीश पाराशर को बेहद अपमानजनक एवं गाली-गलौच की भाषा का प्रयोग कर धमकाने के आरोप में 5 दिसम्बर को गिरफ्तार किए गए संघ के प्रदेश सचिव व भरतपुर जिला अध्यक्ष तथा भरतपुर के ही अतिरिक्त सीएमएचओ डॉ. मनीष चौधरी (45) को एडीजे-8 जयपुर मेट्रो अजय गोदारा ने बुधवार को 25-25 हजार रुपए के जमानत-मुचलके पर जेल से रिहा करने के आदेश दिए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि केस डायरी के अनुसार नामजद अभियुक्त नहीें है। 5 दिसम्बर से अभिरक्षा में है। प्रकरण के अनुसंधान व तत्पश्चात विचरण में समय लगना एक स्वाभाविक स्थिति है। प्रकरण प्रथम वर्ग न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट द्बारा विचारण योग्य है।

डॉक्टर की यह थी दलील : एडवोकेट नरेश कुमार शर्मा ने कोर्ट को बताया कि डाक्टर्स आन्दोलन को दबाने की नीयत से सोची-समझी योजना के तहत प्रार्थी को झूंठा फंसाया गया है। आईपीसी की धारा 353, 5०6, 5०7, 5०4, 419 व 384 एवं आईटी एक्ट की धारा 66 डी व 66 बी का अपराध नहीं बनता। घटना के समय जयपुर में नहीं था। राजकार्य में बाधा नहीं डाली। बताए गए मोबाईल नम्बर से कोई संबंध-सरोकार नहीं है। हृदय रोग व लीवर की गंभीर बीमारियों से ग्रसित है। अरेस्ट कर मानसिक रूप से प्रताड़ित कर कागजों पर हस्ताक्षर करवाए हैं, लिहाजा जमानत दी जाए। जिसका एपीपी जुगल किशोर शर्मा ने विरोध करते हुए गंभीर अपराध बताया एवं जमानत आवेदन खारिज करने का निवेदन किया।

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