मुम्बई। भारत सरकार की पहल पर यूएई सरकार की ओर से भारत के भगौड़े डॉन दाऊद इब्राहिम की पन्द्रह हजार करोड़ रुपए की सम्पत्ति और कंपनियों को सीज कर दिया है। इस पहल से दाऊद इब्राहिम फिर सुर्खियों में है। यह पहला मौका नहीं है जब दाऊद पर शिकंजा कसा गया है। इससे पहले भी दाऊद को पकडऩे और मारने के ऑपरेशन चले हैं। 2013 में तो दाऊद को पाकिस्तान में घुसकर मारने की प्लानिंग हो चुकी है। हालांकि यह पूरी प्लानिंग एक फ ोन कॉल की वजह से रद्द हो गई। इस ऑपरेशन को नाम दिया गया था ऑपरेशन किल दाऊद। मीडिया और खुफिया सूत्रों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के लिए नौ अफसरों की टीम बनाई और उन्हें विशेष ट्रेनिंग दिलाई गई थी। साथ ही पाकिस्तान में ठहरने, आने-जाने, मिलने के ठिकानों की पूरी सूचना और फोटोज उपलब्ध कराए गए थे। ऑपरेशन से जुड़े अफसर पाकिस्तान भी गए। वहां भी पूरी तैयारी की। एक दिन वह तय किया गया, जिस दिन उसे ढेर करना था। वह हर शाम 4 से 6 बजे के बीच डिफेंस हाउसिंग सोसायटी की मेस में जाता था। वहां पाकिस्तानी आर्मी के अफसरों से मिलता था। इसी रास्ते में उसे निशाना बनाने की प्लानिंग बनी थी। ऑपरेशन का मकसद सिर्फ एक रखा था, दाऊद को गोली मारो और गुम हो जाओ। बताया जाता है कि 13 सितंबर 2013 को शाम 4 से 6 बजे के बीच ही दाऊद पर हमले का वक्त तय किया गया। इसे अंजाम देने के लिए सभी अफसर दाऊट के आने-जाने वाले रुट में पडऩे वाली एक दरगाह के पास इकट्ठे भी हो गए। लेकिन तभी किसी अफसर के पास एक फोन आया और तत्काल ही ऑपरेशन रद्द कर दिया। ऑपरेशन को अधूरा छोड़कर सभी अफसर वहां से चले गए। हालांकि कॉल किसका था और ऑपरेशन रद्द क्यों हुआ, उस बारे में खुलासा नहीं हो पाया है। इसके बाद भी दाऊद पर शिकंजा कसने के लिए खुफिया एजेंसियों ने ऑपरेशन प्लान किए हैं। हालांकि मुम्बई बम धमाकों के बाद से ही पाकिस्तान में छिपा दाऊद भारत सरकार के लिए सिरदर्द बना हुआ है। कई ऑपरेशन चले, लेकिन वह अभी तक पकड़ में नहीं आ सका। हालांकि केन्द्र सरकार कई बार कह चुकी है कि दाऊद कहीं भी हो, उसे छोड़ा नहीं जाएगा और भारत में लाया जाएगा।

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