नई दिल्ली। देश के वाराणसी में करीब 5 दिन पूर्व संैकड़ों हवाई यात्रियों के जीवन पर एकाएक मंडराए मौत के संकट को मॉर्डन तकनीक ने उस दूर कर दिया। जब दो यात्री विमान एक दूसरे के इतने नजदीक आ गए थे कि उनके बीच महज 15 सैकंड की दूरी रह गई थी। उस दरम्यान दोनों विमानों के आपस में टकराने की पूरी संभावना बन गई थी। लेकिन ऐनवक्त पर मॉर्डन तकनीक के उपयोग से इस बड़ी दुर्घटना को टाल दिया गया। हालांकि इस मामले में जांच के आदेश दे दिए गए हैं। बताया जा रहा है कि गत रविवार को एयर एशिया का विमान आई5 786 बागडोगरा से दिल्ली जा रहा था, जबकि इंडिगो का प्लेन 6ई 398 दिल्ली से बागडोगरा के लिए उड़ा था। दोनों विमान वाराणसी के आसमान पर उड़ रहे थे। इस दौरान एटीसी ने एयर एशिया के पायलट को निर्देश दिए कि वे विमान को 34 हजार फीट की ऊंचाई पर ही रखें। इस पायलट ने एटीसी के संदेश का जवाब दिया। लेकिन पायलट विमान को बताई गई ऊंचाई पर न रखते हुए 33 हजार फीट के लेवल पर ले आया। इस ऊंचाई पर इंडिगो का विमान पहले ही उड़ रहा था। दोनों विमानों के बीच दूरी महज 9 किलोमीटर रह गई, यानि वे 15 सैकंड में एक दूसरे के सामने आ जाते। तभी एयरबोर्न कलिजन अवॉइडेंस सिस्टम (एसीएस) ने इस बड़ी घटना को टाल दिया। इस तकनीक के सहारे दो विमानों की आमने सामने की टक्कर को रोक दिया जाता है। फिलहाल एयरक्रॉफ्ट ऐक्सिडेंट इन्वेस्टिगेशन बोर्ड मामले में जांच कर रहा है।

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