Supreme Judges

नयी दिल्ली : उच्चतम न्यायालय के चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की ओर से रोस्टर तैयार करने और मामलों के आवंटन के तौर-तरीकों पर ऐतराज जताते हुए कहा कि यह अधिकार न्यायालय के प्रभावी कामकाज के लिए दिया गया है और यह अपने साथियों पर प्रधान न्यायाधीश के उच्च प्राधिकार को कानूनी या तथ्यात्मक रूप से मान्यता नहीं देता। चारों न्यायाधीशों ने आज अभूतपूर्व तरीके से बुलाई गई एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि प्रधान न्यायाधीश ‘‘रोस्टर के मास्टर’’ होते हैं, लेकिन ‘‘इस देश के विधिशास्त्र में भी यह सुस्थापित है कि प्रधान न्यायाधीश अन्य न्यायाधीशों के बराबर ही होते हैं- न अधिक या न ही कम।’’

उच्चतम न्यायालय व्यवहार एवं प्रक्रिया और कार्यालय प्रक्रिया, 2017 के अनुसार, मुकदमों का रोस्टर प्रधान न्यायाधीश के आदेश पर शीर्ष न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) की ओर से तैयार किया जाता है। इसमें कहा गया है, ‘‘प्रधान न्यायाधीश के आदेश पर रजिस्ट्रार (जे-आई) की ओर से रोस्टर तैयार किया जाता है। इसमें किसी पीठ को काम आवंटित करने के बाबत सामान्य या विशेष निर्देश हो सकते हैं और इसमें, अनुपलब्ध रहने पर, किसी पीठ के काम को किसी अन्य पीठ को आवंटित करना शामिल है।’’ प्रक्रिया में कहा गया कि आकस्मिक स्थितियों से निपटने के लिए प्रधान न्यायाधीश समय-समय पर रजिस्ट्रार (जे-आई) को रोस्टर निर्देश या न्यायिक कार्य के पुन: आवंटन के लिए संशोधन संबंधी निर्देश दे सकते हैं। उच्चतम न्यायालय के एक वकील एवं संविधान विशेषज्ञ ने नाम का खुलासा नहीं करने की शर्त पर बताया कि कई ऐसे फैसले हैं जो प्रधान न्यायाधीश की ओर से मुकदमों के आवंटन की प्रक्रिया तय करते हैं, लेकिन प्रधान न्यायाधीश की ओर से साथी न्यायाधीशों को काम आवंटित करने पर कोई विशेष दस्तावेज नहीं है।

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