जयपुर। चंद्रशेखर आजाद भारतीय इतिहास में एक ऐसी शख्सियत का नाम है जिसने भारत को आजादी दिलाने के लिए कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। उन्हें आजादी इतनी प्यारी थी कि उन्होंने अपने नाम के आगे ही आजाद शब्द लगा लिया। जब वे अंग्रेजों से बचने के लिए इधर-उधर जाते थे तो कहते थे कि आजाद तो आजाद ही रहेगा। उसे कोई नहीं पकड़ सकता। चंद्रशेखर आजाद का जयपुर से भी गहरा नाता है। वे अपने दिनों में जब आजादी की लड़ाई चरम पर थी जयपुर आते थे। और अपने मिलने वालों के यहां ठहरते थे तथा अपनी गतिविधियों को अंजाम भी देते थे। तथा वे अपने जरूरी हथियार भी यहीं रखते थे।

जिनकी हिफाजत जयपुर के रहने वाले उनके क्रान्तीकारी साथी बहुत ही सजगता से करते थे। जब भी आजाद को जरुरत होती तो यहां से हथियार उन तक पहुंचाए जाते थे। अंग्रेजों को जब पता चला तो उन्होंने वहां छापा मारा लेकिन जब भी अंग्रेज छापा मारते चन्द्रशेखर आजाद वहां से बच निकलते। अंग्रजों को न तो हथियार मिलते और ना ही आजाद। वे अपना सा मुंह लेकर रह जाते। आजाद का जयपुर के संस्कृत कॉलेज के छात्रों से भी गहरा रिश्ता है वे यहां के छात्रों में आजादी की अलख जगाते थे तथा उन्हें अपने दल में शामिल करके अंग्रेजों के खिलाफ लोहा लेने के लिए अपने संगठन को मजबूत करते थे। वे खूद भी संस्कृत के छात्र थे इसलिए उन्हें उनसे घूलने-मिलने में आसानी हुई। ऐसे ही कई सबूत आज भी मौजूद हैं जो बयां करते आजाद के जयपुर से जुड़े उस गहरे रिश्ते की कहानी जो बहुत ही कम लोग जानते हैं।

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