-राधा गोविन्द के दर्शन व अन्नकूट प्रसादी के लिए आस्टे्लिया से आया विदेशी परिवार, ईसाई धर्म छोड़ सनातन धर्म ग्रहण किया। अपने घर को बना दिया राधा-गोविन्द का मंदिर। अब जन्माष्टमी पर जयपुर आएगा यह परिवार। 

– राकेश कुमार शर्मा
जयपुर। अपनी मनमोहक मुस्कान, दैवीय शक्ति और गीता के माध्यम से धर्म-अधर्म का संदेश देने वाले भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में देश-विदेश में करोड़ों भक्त लगे रहते हैं। ऐसा ही एक भक्त आस्टे्रलिया का है, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में ऐसा रमा हुआ है कि वह अपने देश में कम और भारत में श्रीकृष्ण के धार्मिक स्थलों में ही आकर उनकी भक्ति में लीन रहता है। साथ में उसकी भारतीय पत्नी और दो बच्चे भी कृष्ण के अनुयायी बनकर आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और दैवीय शक्ति से प्रभावित आस्टे्रलियन नागरिक ने अपना ईसाई धर्म बदलकर सनातन धर्म ग्रहण कर लिया है। यहीं नहीं बिजनेस को तिलांजलि देकर सिर्फ ठाकुरजी की भक्ति में ही लीन रहते हैं। इतना ही इस परिवार ने अपने घर को मंदिर में तब्दील कर दिया है। इन्होंने यहां राधा-गोविन्द का दरबार सजा दिया है, जहां वे तो पूजा-अर्चना करते हैं, साथ ही आस्टे्रलिया में रहने वाले कृष्ण भक्त भी वहां आकर पूजा अर्चना करते हैं। हरे कृष्णा हरे रामा के सत्संग की धुन और भजन कार्यक्रम के आयोजन होते ही रहते हैं। पूरा परिवार गोस्वामी परम्परा के तहत भारतीय वेशभूषा में रहता है और माथे पर लम्बा तिलक लगाते हैं। इनकी एक बेटी और एक बेटा भी कृष्ण के अनन्य भक्त है। दस साल का बेटा लम्बी शिखा रखता है। उसके पिता हमेशा सिर पर भारतीय परम्परा के अनुसार पगड़ी बांधे रहते हैं। लम्बी दाढ़ी रखते हैं। img-20161104-wa0001जयपुर के राधा गोविन्द देवजी समेत अन्य मंदिरों के दर्शन करने और गोवर्धन में अन्नकूट प्रसादी के लिए यह परिवार दिवाली के मौके पर आस्टे्रलिया से जयपुर आया। माथे पर तिलक लगाकर और धोती-कुर्तें में यह परिवार राधा-गोविन्द मंदिर और दूसरे मंदिरों में पहुंचा तो हर किसी के बीच कौतूहल भरी नजरों में रहा। हालांकि आस्टे्रलियन युवक जो मदन मोहन के नाम से जाने जाते हैं। फर्राटेदार हिन्दी में गीता के श्लोक संस्कृत में बोलकर हर किसी को अचंभित कर देते हैं, बल्कि भगवान कृष्ण से जुड़ी लीलाओं और प्रसंगों को ऐसे सुनाते हैं, जैसे कोई कथावाचक भक्तों को सुनाता है। यह परिवार जयपुर में नंदपुरी स्थित रानी महल होटल में ठहरा था। उनके सादगी और पाण्डितयपूर्ण व्यवहार को देखकर होटलकर्मी भी अचंभित हो उठे। होटल संचालक मनीष शर्मा कहते हैं कि जब यह परिवार राधा-गोविन्द देवजी के मंदिर में गया तो ठाकुरजी की प्रतिमा देखकर भाव-विभोर हो उठा। पति-पत्नी और दोनों बच्चे राधे-गोविन्द, राधे गोविन्द कहते कहते इतने भाव विह्ल हो गए कि उनकी आंखों से आसूं छलक पड़े। राधे-राधे गाते हुए भक्तों की तरह नाचने लगे। वहां मौजूद श्रद्धालु भी इनकी भक्ति को देखकर आश्चर्यचकित हो उठे। इसी तरह गोपीनाथजी के मंदिर में भी भगवान के दर्शन करके भावुक हो उठे थे। करौली, नाथद्वारा और गोवर्धन में भी भगवान कृष्ण मंदिर के दर्शन किए हैं। गोवर्धन में तो अन्नकूट प्रसादी प्राप्त की और वहां से प्रसाद भी लेकर आए। जो इन्होंने होटलकर्मियों को भी बांटा। अब यह परिवार जन्माष्टमी पर गोविन्ददेवजी के दर्शनार्थ आने की कहकर गया है। मदन मोहन ही नहीं उनकी पत्नी और बच्चे भी अनन्य कृष्ण भक्त दिखे। भगवदगीता से जुड़े श्लोक तो संस्कृत में ऐसे बोल रहे थे कि जैसे कोई संस्कृत विद्वान और कथावाचक बोलते हैं। अभिवादन में भी नमस्ते या हैलो के बजाय वे राधे-राधे ही कहते हैं।

– देवभूमि है भारत

आस्टे्रलिया निवासी मदन मोहन से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा, भारत देवभूमि है। जितने भी अवतार हुए हैं, वे भारतभूमि में हुए। अन्यत्र कहीं भी ऐसे अवतार नहीं हुए हैं। भगवान श्रीकृष्ण तो दुनिया के पालनहार है। गीता जैसा महान ग्रंथ दुनिया को दिया है। गीता ज्ञान और कृष्ण भक्ति से ही दुनिया में अच्छाई आ सकती है। वे पूछने लगे कि सिर पर तिलक क्यों लगाते हैं। सनातन धर्म में मंत्रों के उच्चारण का क्या महत्व है। गाय को मां का दर्जा और उसकी पूजा क्यों करते हैं जैसे कई प्रश्न पूछकर उनके उत्तर भी दिए। उनसे जुड़े श्लोक भी पढ़े। इन्होंने यह भी कहा कि अगर भगवान श्रीकृष्ण के पूर्ण विग्रह के साक्षात दर्शन करने हैं तो राधा-गोविन्ददेवजी, गोपीनाथ जी, श्रीनाथ जी, मदनमोहन जी और गोवर्धन जी के दर्शन करने चाहिए। वो भी एक ही दिन में। कृष्ण भक्त बनने के बाद घर में ही राधा-गोविन्द का मंदिर बनाया है, जहां रोज पूजा अर्चना और सत्संग होता है। दूसरे भक्त भी आते हैं मंदिर में। वे कहते हैं कि अगली जन्माष्टमी पर फिर से जयपुर आएंगे और कृष्ण मंदिरों के दर्शन करेंगे।

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