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जयपुर। जयपुर में हो रहे स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत परकोटे में बिजली लाइनों को भूमिगत करवाने के कार्य में भ्रष्टाचार और नियमों के विपरीत कार्यों की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक पहुंच गई है। पीएमओ कार्यालय ने परिवाद को अनुसंधान के लिए संबंधित विभाग में प्रेषित कर दिया है। भूमिगत लाइनें बिछाने, सीमेन्टेड पिलर बनाने में हुए गलत कार्यों को लेकर एडवोकेट भगवत गौड़ ने पीएमओ कार्यालय में परिवाद दिया है, जिसमें जयपुर डिस्कॉम के अभियंताओं की मिलीभगत से निविदाकर्ता फर्म द्वारा बरती जा रही लापरवाही और गलत कार्यों से अवगत कराया है, साथ ही इस मामले की उच्च स्तरीय जांच करवाकर दोषी अभियंता व फर्म के खिलाफ कार्रवाई की गुहार की गई है।

बिगड़ रही है सूरत
पीएम नरेन्द्र मोदी कार्यालय को भेजी गई शिकायत में बताया है कि हेरिटेज व पर्यटन सिटी के तौर पर मशहूर जयपुर में ओवरहेड बिजली लाइनों को भूूमिगत करने के लिए करोड़ों रुपए के ठेके स्वीकृत किए गए हैं। जयपुर डिस्कॉम ने भूमिगत लाइनों के लिए सड़क किनारे भूमिगत केबल बॉक्स (लोहे-सीमेंटेड पिलर) लगाने थे। नियम है कि ये तय रुट पर ही लगेंगे, लेकिन निविदाकर्ता फर्म ने नियमों के विपरीत गंदे पानी के नालों व नालियों पर ये पिलर खड़े कर दिए है, जो कभी भी जानलेवा हो सकते हैं और हेरिटेज को भी बिगाडने वाले है। इस संबंध में फर्म स्वास्तिक इलेक्ट्रिकल एण्ड फ र्टिलाइजर्स जयपुर की शिकायत की गई, लेकिन अभियंता उसे बचाने में लगे हुए हैं और गलत कार्यों को बढावा दे रहे हैं। पिलर भी तय मापदण्ड के अनुसार नहीं बनाए है और ना ही साइज रखी गई है। परिवाद में बताया कि सिविल स्ट्रेक्चर रोड़ लेवल से 1.5 फ ीट यानि 18 इंच ऊपर होना चाहिए, लेकिन फर्म ने इसकी पालना नहीं की और 8 से10 इंच का स्ट्रेक्चर बनाकर पिलर खड़े कर दिए, वे भी गलत तरीके से और गलत जगहों पर। इस कार्य में पचास करोड़ रुपए खर्च होने है, जिससे जयपुर शहर की खूबसूरती को चार चांद लगे, लेकिन डिस्कॉम अफसरों की मिलीभगत से ना केवल भूमिगत लाइन कार्य गलत हो रहा है, बल्कि खूबसूरती पर भी दाग लग रहा है।

सोलह फरवरी, 2018 को फर्म को यह कार्य मिला था और उसे नौ महीने में यह पूरा करना था। लेकिन अभी तक आधा काम अधूरा पड़ा हुआ है। परिवाद में गुहार लगाई है कि इस मामले की उच्च स्तरीय कमेटी बनाकर जांच करवाई और मामले में दोषी पाए जाने पर अफसरों व फर्म के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही निविदा शर्तों का उल्लंघन करने वाली फर्म को ब्लैक-लिस्टेड करने की कार्यवाही की जाए। परिवाद में यह भी मांग की है कि इस फर्म के खिलाफ पूर्व में भी कई तरह के आरोप लगे हैं, लेकिन डिस्कॉम ने कोई कार्रवाई नहीं की। ऐसे में केन्द्र सरकार के अधीन किसी ईमानदार अधिकारी से गोपनीय टीम गठित करवाकर मामले की जांच करवाई जाए। जिससे जयपुर स्मार्ट सिटी के तहत किए जा रहे भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं का खुलासा हो सके।

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