rajput-ravana-society-sweeps-vasundhara-government-sleep
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जयपुर। राजस्थान के अजमेर, अलवर संसदीय क्षेत्र और मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर राजपूत रावणा समाज ने वसुंधरा राजे सरकार और भाजपा की नींद उड़ा दी है। राजपूत रावणा समाज के नेताओं और संगठनों ने तीनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को हराने का ऐलान कर दिया है। जयपुर के राजपूत सभा भवन में हुई बैठक में राजपूत व रावणा समाज के सभी प्रमुख संगठनों व नेताओं ने एकराय होकर अजमेर में कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा को समर्थन देने का भी ऐलान कर दिया है। बैठक में नेताओं ने रघु शर्मा का साफा पहनाकर समाजबंधुओं का वोट दिलाने का आश्वासन दिया है। साथ ही राजपूत बहुल गांव-ढाणियों व कॉलोनियों में जनसम्पर्क करके वोट दिलाने का आह्वान किया है। तीनों सीटों पर भाजपा प्रत्याशियों को शिकस्त देकर सबक सिखाने के लिए राजपूत रावणा समाज संघर्ष समिति बनाई है, जिसमें सभी संगठनों के प्रमुख पदाधिकारियों को शामिल किया गया है।

यह समिति तीनों चुनाव क्षेत्र में कार्यालय भी खोलेंगी, साथ ही राजपूत बहुल इलाकों में चुनावी सभा करके राजपूत-रावणा समाज के साथ हुई वादाखिलाफी और समाज के युवाओं के साथ हो रही प्रताडऩा, राजनीतिक उपेक्षा के बारे में भी खुलास करेगी। संघर्ष समिति के प्रवक्ता दुर्ग सिंह खींवसर ने बताया कि मंगलवार को अजमेर में संघर्ष समिति का कार्यालय खोला जाएगा, जिसमें समाज के सभी बड़े नेता व पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। अलवर व मांडलगढ़ में भी चुनावी कार्यालय खोलकर भाजपा को सबक सिखाया जाएगा। अजमेर में कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा को राजपूत रावणा समाज ने समर्थन दे दिया है, जल्द ही अलवर व मांडलगढ़ के बारे में समिति फैसला लेगी। रावणा-राजपूत समाज की इन घोषणाओं ने भाजपा एवं राज्य सरकार की नींद उड़ा दी है। समाज के नेताओं के बीजेपी प्रत्याशियों को हराने व कांग्रेस को समर्थन देने से भाजपा को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है। तीनों सीटों पर ही राजपूत-रावणा समाज के वोटर्स की तादाद अच्छी खासी है। वे उलटफेर की ताकत रखते हैं। सरकार ने राजपूत नेताओं को मनाने के लिए डैमेज कंट्रोल शुरु कर दिया है।

अब देखना है कि चार साल से घोर उपेक्षा झेल रहे राजपूत संगठनों के पदाधिकारी, नेता और युवाओं का विश्वास भाजपा और राज्य सरकार फिर से जीत पाती है या नहीं। क्योंकि आनन्दपाल एनकाउंटर मामले के बाद भड़के राजपूत युवाओं व समाज में भाजपा व सरकार के खिलाफ खासा आक्रोश है। इस मामले में सरकार और सरकार में शामिल राजपूत मंत्रियों व विधायकों ने भी समाज का साथ नहीं दिया था, जिससे समाज में भाजपा के प्रति खासा गुस्सा है। अब यह गुस्सा कब तक रहता है, यह देखने की बात है। अगर उप चुनाव में राजपूत-रावणा समाज ने गुस्स जाहिर कर दिया तो भाजपा सरकार व पार्टी को खासा नुकसान झेलना पड़ सकता है, जिसकी आंच दिसम्बर में होने वाले विधानसभा चुनाव और फिर लोकसभा चुनाव में भी झेलनी पड़ सकती है।

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