दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 20 नवंबर, 2016 को प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमए-जी) का शुभारंभ किया था। नई ग्रामीण आवास योजना कार्यक्रम को परिवारों की जरूरतों और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए तैयार किया गया है। यह योजना स्थानीय सामग्री और स्‍थानीय घरों के डिजाइनों का उपयोग करके घरों का निर्माण करने की अनुमति देती है। इन घरों में खाना पकाने के क्षेत्र, शौचालय, एलपीजी कनेक्शन, बिजली कनेक्शन और जल की आपूर्ति समन्‍वय के माध्यम से होगी। इसके अलावा लाभार्थी अपनी जरूरत के मुताबिक अपने घरों की योजना बना सकते हैं। इन मकानों के गुणवत्तायुक्‍त निर्माण के लिए महत्वपूर्ण कौशल की जरूरत है। उसे पूरा करने के लिए गांवों के राजमिस्त्रियों के प्रशिक्षण का कार्यक्रम शुरू किया गया है। लाभार्थियों का चयन बेघर या कच्‍ची छत्‍त वाले एक या दो कच्‍चे कमरों में रहने वाले लोगों की सामाजिक, आर्थिक जनगणना (एसईसीसी) के डाटा का उपयोग करके एक कठोर प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। इसमें किसी प्रकार की त्रुटियों का समावेश न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी मान्यता के आधार पर ग्राम सभा द्वारा एसईसीसी डाटा को विधिमान्य किया गया है। सीएजी की कार्य निष्पादन लेखापरीक्षा रिपोर्ट 2014 में अपात्र लाभार्थियों के इंदिरा आवास योजना (आईएवाई) के अंतर्गत आने की समस्या पर प्रकाश डाला गया था। पीएमए-जी के चयन में 3 स्‍तरीय चयन प्रक्रिया के माध्यम से, पूरी तरह सावधानी बरती गई है। वर्ष 2016-17 के लिए कुल मिलाकर 44 लाख घरों को मंजूरी दी गई थी और ग्रामीण विकास मंत्रालय दिसंबर 2017 तक इन घरों का निर्माण करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है। पीएमए-जी में 6 से 12 महीनों की कार्य समाप्‍त अवधि का पालन किया जा रहा है। वर्ष 2016-17 के दौरान पीएमए-जी में लाभार्थियों के चयन, आईटी/डीबीटी मंच, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी उपयोग, ग्रामीण राजमिस्त्रियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, आवास डिजाइन आदि को अंतिम रूप देने संबंधी सभी कार्यों को पूरा करने का लक्ष्‍य रखा गया था। अन्य मुख्‍य उद्देश्‍य लगभग 36 लाख अधूरे बने इंदिरा आवास योजना के घरों को पूरा करना था जो 1 से 4 साल की अवधि से लंबित पड़े थे। राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार वर्ष 2016-17 में कुल 32.14 लाख मकानों का निर्माण हुआ है। आवास सॉफ्ट एमआईएस पर नेटवर्क और आईटी से संबंधित मुद्दों के कारण अभी तक आवाससॉफ्ट पर केवल 24.81 लाख पूरी तरह बने घरों को ही अपलोड किया गया है। वर्ष 2016-17 में पूरी तरह बने घरों की संख्‍या पहले के वर्षों की तुलना में बने घरों से 2 से 3 गुना अधिक है। शेष मकान भी अपलोड किए जाने की प्रक्रिया में हैं आवाससॉफ्ट एमआईएस और आईटी/ डीबीटी प्रणाली का शत प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया किया गया है। शासन सुधार के एक हिस्से के रूप में पहले ग्रामीण आवास कार्यक्रम के लिए प्रत्येक जिले में 2 से 20 बैंक खातें थे। अब राज्य स्तर पर एक एकल नोडल खाता है जहां से अब धन इलेक्ट्रॉनिक रूप से आवाससॉफ्ट-पीएफएमएस प्लेटफार्म पर सीधे ही लाभार्थी के खाते में हस्‍तांतरित किया जाता है। पीएमएवाई के तहत वर्ष 2022 तक लाभार्थियों का चयन प्राथमिकता के आधार पर पारदर्शी तरीके से किया गया है। तीन स्‍तरीय चयन में यह सुनिश्चित किया है कि केवल वास्तविक रूप से गरीब बेघर और टूटेफूटे घरों में रहने वाले लोगों का ही चयन किया जाए। अधिकांश परिवार कमजोर समूहों से संबंध रखते है और इनमें भी अधिकांश संख्या में महिलाओं को लाभार्थी के रूप में चुना गया है। आवास डिजाइन रूपों में आपदा लचीलापन वाली विशेषताओं को अंतिम रूप दिया गया है जिन्हें राज्य सरकारें इस कार्यक्रम के तहत उपयोग कर रही है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) द्वारा अनुमोदित योग्यता के अनुसार ग्रामीण मिस्त्रियों को प्रशिक्षण देकर तथा उनके मूल्यांकन और प्रमाणीकरण को सुनिश्चित करके उनकी कारीगरी और रोजगार में सुधार किया जा रहा है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, कर्नाटक और असम जैसे राज्य पीएमए-जी के कार्यान्वयन में शीर्ष पर हैं। बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, असम, झारखंड, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्य बहुत बड़ी संख्‍या में अधूरे पड़े इंदिरा आवास योजना के मकानों को पूरा करने में बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। ग्रामीण विकास विभाग वर्ष 2017-18 में 51 लाख मकानों को पूरा करने की योजना बना रहा है। वर्ष 2017-18 में 33 लाख अतिरिक्त मकान मंजूर किए जाएंगे। वर्ष 2018-19 इतनी ही संख्या मकान पूरा करने का प्रस्ताव है। इस प्रकार वर्ष 2016-2019 की अवधि के दौरान 1.35 करोड़ मकानों का निर्माण पूरा हो जाएगा। इससे वर्ष 2022 तक सभी को मकान उपलब्‍ध कराने का मार्ग प्रशस्‍त होगा।

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