'Mazaro Naz-Mazaro raj' campaign started

आम आदमी पार्टी ने शुरु किया किसानों की मांग मुखरता से उठाने के लिए बड़ा अभियान
जयपुर। राजस्थान में किसान राज की स्थापना के लिए किसान अब सत्ता की चाबी अपने में हाथ में लेने का संकल्प लेंगे। इसके लिए ‘म्हारो नाज—म्हारो ही राज’ महा​अभियान का आगाज जयपुर में हुआ। पिंकसिटी प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट, आम आदमी पार्टी के राजस्थान प्रभारी दीपक बाजपेयी, सह प्रभारी खेमचंद जागीरदार और समन्वयक देवेंद्र शास्त्री ने इस महा​अभियान के बैनर का विमोचन किया। आम आदमी पार्टी में हाल में शामिल हुए किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि राजस्थान की सरकार ने किसानो को आंदोलन के लिए एक इंच जमीन नहीं दी, उसके बदले अब महाअभियान छेड़ा जाएगा। किसान अब जमीन लेने वाले नहीं, देने वाले बनेंगे। राजस्थान में किसान राज की स्थापना की जाएगी। गांवों में चौपाल—चौपाल तक पहुंचेगे और किसानों को शपथ दिलवाएंगे। इसके लिए टोंक विधानसभा क्षेत्र के किसान *सीताराम गुर्जर ने नारा दिया है ‘म्हारो नाज—म्हारो ही राज’।* यानि अनाज भी हमारा होगा और सत्ता भी हमारी ही होगी। किसान तय करेगा कि अनाज के दाम क्या होंगे और बीमा कितने में होगा।

उन्होंने बताया कि इसके लिए प्रदेश स्तर के संयोजक संभागवार संयोजक, जिलेवार संयोजक और जिलवार संयोजक खरीद केंद्र पर संयोजक नियुक्त करेंगे। ये टीमें गांव—गांव दौरा करेगी और किसानों की हक के लिए लड़ेगी। किसान नेता रामपाल जाट ने कहा कि छह दिन के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने घुटने टेक दिए लेकिन, अब और दूसरे अडंगे लगा दिए है। समर्थन मूल्य पर मूंग, उडद, सोयाबीन की खरीद के लिए पंजीयन शुरु कर दिया है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही सरकार ने मूंग की गुणवत्ता के आधार पर रिजेक्शन की नीति भी लागू की है जो किसान विरोधी है। आम आदमी पार्टी और महापंचायत इसका विरोध करती है।

दूसरे, प्रदेश में छह लाख से ज्यादा किसानों ने बीमा कंपनियों को प्रीमियम भर दिया लेकिन, अभी तक उसके क्लेम पास नहीं​ किए जा रहे हैं। कंपनियां क्रॉप ​कटिंग नहीं होने का बहाना लगा रही है। जाट ने कहा कि आकलन के लिए क्रॉप कटिंग की जिम्मेदारी बीमा कंपनियों की है। सरकार के साथ मिलकर उसे ये काम करना चाहिए था जो नहीं किया। अब किसान को परेशान किया जा रहा है। सरकार और बीमा कंपनियों की इस नीति के कारण किसान पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। वह अपना पुराना कर्ज चुकाने की स्थिति में नहीं है।
रामपाल जाट ने बताया कि मूंग को गुणवत्ता के आधार रिजक्ट किया जा रहा है। दूसरी तरफ बीमा कंपनियां क्लेम नहीं दे रही है। ऐसे में किसान को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके लिए उन्होंने सरकार को फार्मूला दिया कि मूंग की गुणवत्ता जांच लो। जितनी गुणवत्ता कम है उतनी राशि काटकर बाकी का भुगतान कर दें। बाकी बची हुई शेष राशि का भुगतान बीमा योजना से कर दें। इस प्रकार किसान को मूंग के लिए प्रति क्विंटल 6975 रुपए का भुगतान किया जा सकता है।

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