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जयपुर। जम्मू-कश्मीर में पाक गोलीबारी में शहीद हुए प्रदेश के असिस्टेंट कमांडेंट जितेन्द्र सिंह, एएसआई रामनिवास और कांस्टेबल हंसराज गुर्जर के पार्थिव देह आज उनके पैतृक गांव में पहुंची, जहां राजकीय सम्मान से उनकी अंत्येष्टि की गई। हजारों लोगों ने नम आंखों से शहीदों को अंतिम विदाई दी।

सुबह शहादत के तिरंगे में लिपटे तीन शहीदों की देह उनके पैतृक गांव पहुंची। सेना के जवानों ने जैसे ही शहीदों की देह वाहन से नीचे उतारी तो यह देख हर कोई भावुक हो उठा। लोगों के आंखों से आसूं छलक पड़े तो परिजन अपने लाल को देख सुध-बुध खो बैठे। जितेन्द्र सिंह, रामनिवास और हंसराज गुर्जर के माता-पिता, पत्नी, भाई और बेटे-बेटियों की आंखों से आसूं बहते रहे। जितेन्द्र और हंसराज के मासूम बच्चों को देख हर किसी के नेत्र भीगे हुए थे, बहुत से बुजुर्ग उन्हें रोते हुए दुलार रहे थे। दाह संस्कार से पहले हजारों लोगों ने शहीदों के अंतिम दर्शन किए। सेना और पुलिस ने गार्ड आॅफ आॅनर दिया। जैसे ही शहीदों की अर्थी उठी तो उनके जयकारों से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो गया। हजारों लोगों व परिजनों ने अपने लाडले शहीदों को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी।

शहीद जितेन्द्र सिंह के पार्थिव देह के उनके गांव सलेमपुर पहुंचने और दाह संस्कार के समय भरतपुर जिला कलक्टर, एसपी समेत अन्य आला अफसर नहीं आने से लोगों में गुस्सा दिखा। लोगों ने जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, पर्यटन मंत्री कृष्णेन्द्र कौर दीपा, सांसद बहादुर सिंह कोली, सेना के आला अफसर और जवान मौजूद रहे।

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