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जयपुर। यूपी में कांग्रेस का महागठबंधन बनाने का सपना फेल हो गया है। कांग्रेस सपा, बसपा, आरएलडी समेत अन्य छोटे दलों के साथ मिलकर महागठबंधन के प्रयास में लगी हुई थी, लेकिन उसकी उम्मीदों पर सपा और बसपा ने पानी फेर दिया। आज सपा और बसपा प्रमुख मायावती और अखिलेश यादव ने संयुक्त प्रेस वार्ता करके 38-38 सीटों पर चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया है। कांग्रेस के लिए सिर्फ अमेठी और रायबरेली छोड़ी है। दो सीटें अन्य सहयोगियों के लिए छोड़ी है। इस ऐलान से कांग्रेस सकते में है, हालांकि बसपा और सपा गठबंधन को लेकर अटकलें काफी समय से चल रही थी।

आज दोनों नेताओं ने घोषणा करके महागठबंधन की हवा निकाल दी है। महागठबंधन के माध्यम से कांग्रेस यूपी में पन्द्रह सीटें मांग रही थी, लेकिन सपा-बसपा इसके विरोध में थी। वे सिर्फ दो सीटें देने में तुली हुई है। कांग्रेस पन्द्रह सीटें मांग रही है। ऐसा ना होने पर अकेले यूपी में चुनाव लडऩे का ऐलान कर चुकी है। तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस सरकार के गठन के बाद पार्टी में उत्साह है। वे अकेले दम पर चुनाव लड़ सकती है।

यूपी में राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने अपनी सीटें जीती थी। एक दर्जन सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी कांग्रेस। ऐसे में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी हाल ही बयान में संकेत दिए थे कि वे सपा और बसपा के बिना भी अकेले चुनाव लड़ सकते हैं। अब जब सपा और बसपा ने ऐलान कर दिया है तो कांग्रेस के पास या तो दो सीटों पर चुनाव लडऩे या फिर सभी अस्सी सीटों पर प्रत्याशी उतारने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। वैसे यूपी में कई सीटों पर कांग्रेस का प्रदर्शन अच्छा रहा है और संगठन भी मजबूत है। भाजपा से नाराज छोटे दलों और आरएलडी से कांग्रेस गठबंधन करके भी प्रत्याशी उतार सकती है। अगर कांग्रेस इसमें सफल रही तो बसपा और सपा के गठबंधन को कई जिलों में नुकसान पहुंच सकता है, वहीं यह गठबंधन भाजपा के लिए कहीं खतरा तो कहीं फायदे का सौदा साबित होगा।

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