जयपुर। जयपुर के दीपक ने उन चार लोगों की जिंदगी में रोशनी डाल दी है, जो अपने ह्दय, लीवर व किड़नियां खराब होने के चलते लम्बे समय से ना केवल बीमार चल रहे थे, बल्कि जीवन के सफर में अंतिम क्षणों में चल रहे थे। सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल होने के बाद ब्रेन डैड घोषित कर दिए जयपुर के हरमाडा निवासी दीपक स्वामी के परिजनों ने दीपक के अंगों को दान देने की साहसिक पहल करके चार जिंदगियों को बचाया। वह भले ही दुनिया से रुखसत कर गया हो, लेकिन भगवान के पास जाने पर भी उसकी ह्दय, किडनियां और लीवर दूसरों की जिंदगी में धड़कते व काम करते रहेंगे।  26 साल के दीपक एक दुर्घटना के कारण ब्रेन डेड हो गया था। उसका परिवार अंगदान के लिए राजी हुआ और दीपक का हृदय, लीवर और दोनों किडनियों ने चार लोगों को नई जिंदगी दे दी। इनमें लीवर और दोनों किडनियों का प्रत्यारोपण जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल में हुआ, जबकि हृदय को ग्रीन काॅरीडोर के जरिए रातों-रात दिल्ली भेजा गया और दिल्ली एम्स में हृदय का सफल प्रत्यारोपण हुआ।  दीपक के पिता ग्यारसी लाल विकलांग हैं तो बड़ा भाई टीबी का मरीज है। ऐसे में दीपक पर घर चलाने का भी जिम्मा था। गरीब परिवार के चिराग दीपक की लौ लगभग बुझ ही चुकी थी। इसी दौरान यहां के डाॅक्टरों ने उसके परिजनों को दीपक के अंग दान के लिए प्रेरित किया। परिजनों की सहमति के बाद दीपक के दिल, लिवर और दोनों किडनी के प्रत्यारोपण की तैयारी की गई। शुक्रवार रात से प्रक्रिया शुरू हुई। रात एक बजे विमान से दीपक का दिल दिल्ल्ी भेजा गया। जहां दिल्ली एम्स में इसका सफल प्रत्यारोपण हुआ। वहीं शुक्रवार सुबह लीवर और किडनियों का जयपुर में सफल प्रत्यारोपण किया गया। दीपक के भाई का कहना है कि हमारे लिए तो दीपक मिट्टी हो चुका था, यही कारण था कि हमने अंगदान का निर्णय किया। इससे अब चार जिंदगियों को बचाया जा सकेगा। एसएमएस मेडिकल काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. यू.एस.अग्रवाल ने बताया कि इस एमओयू के तहत आईएलबीएस के डाॅक्टर यहां 25 लीवर प्रत्यारोपण करेंगे और यहां के डाॅक्टरों को इसकी प्रक्रिया सिखाएंगे। इसके बाद जयपुर के डाॅक्टर भी आईएलबीएस में जाकर लीवर प्रत्यारोपण करेंगे। राजस्थान के चिकित्सा मंत्री कालीचरण सराफ ने लीवर प्रत्यारोपण के लिए डाॅक्टरों को बधाई देते हुए कहा कि अंगदान करने वाले परिवार को राज्यस्तारीय समारोह में सम्मानित किया जाएगा और राज्य के सभी सम्भाागों में भी अंग प्रत्यारोपण की सुविधा विकसित की जाएगी।

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