नई दिल्ली। कालेधन और बेनामी लेन-देन के खिलाफ केन्द्र सरकार ने तीखे तेवर दिखाने शुरु कर दिए हैं। बेनामी सम्पत्तियां खरीद-बेचान करने वाले लोगों के खिलाफ सरकार ने कड़ी कार्रवाई शुरु कर दी है। आयकर विभाग ने अब तक चार सौ से अधिक बेनामी लेन-देन और सम्पत्तियां का पता लगाया है। करीब छह सौ करोड़ रुपए से अधिक सम्पत्तियां कुर्क करके कालेधन में लिप्त लोगों पर सख्त कार्रवाई की है। देश में नए बेनामी सम्पत्ति-लेन-देन कानून लागू किए जाने के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी सरकार ने कालेधन वालों के खिलाफ सख्ती करनी शुरु कर दी है। ऐसे लोगों और सम्पत्तियां का पता लगाने के लिए आयकर विभाग ने पूरे देश में 24 बेनामी निषेध इकाईयां गठित की है। आयकर विभाग ने राजस्थान, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, पंजाब समेत कई राज्यों में ढाई सौ से अधिक मामले बेनामी सम्पत्तियों के चिन्हित किए हैं, जिनमें पैसा लगाने वाला तो कोई ओर है और खरीददार उनके कर्मचारी, रिश्तेदार होते हैं। राजस्थान के जयपुर में भी ऐसा मामला पकड़ में आया है। मध्यप्रदेश की एक कंपनी के मालिकों ने अपने वाहन चालक के नाम से जयपुर में 7.7 करोड़ रुपए की बेनामी सम्पत्तियां खरीद ली। जब इन खरीदी सम्पत्तियों के आय-व्यय का ब्यौरा मांगा तो चालक को कोई जवाब देते नहीं बना। इसी तरह एक अन्य व्यापारी ने भी अपने पूर्व कर्मचारी के नाम से नौ से अधिक जमीनें व भूखण्ड खरीद रखे थे। उस कर्मचारी को इनके बारे में पता तक नहीं था। पडताल में उस व्यापारी का पता लगा। विभाग ने इनके खिलाफ जांच शुरु कर दी है। कुछ इस तरह के मामले दूसरे राज्यों में पकड़े गए हैं, जहां कर्मचारियों, रिश्तेदारों व परिचितों के नाम पर बेनामी सम्पत्तियां खरीदी और बेची गई है। आयकर विभाग एक साल पहले आए नए बेनामी सम्पत्ति कानून के तहत दोषी लोगों पर कानूनी कार्रवाई कर रहा है। इनमें सात साल की सजा का प्रावधान है, साथ ही बेनामी सम्पत्तियां कुर्क होगी। आयकर विभाग एक दशक के दौरान हुए करोड़ों रुपए के जमीनी सौदों और कंपनियों में निवेश की पडताल में लगा रहै। कंपनियों के नाम पर बड़ी संख्या में बेनामी जमीनी सौदे हुए हैं। कर्मचारियों के नाम से फर्जी कंपनी और निदेशक बनाकर जमकर जमीनी सौदे किए गए और फिर उन्हें मोटा मुनाफा कमाकर बेचने का गौरखधंधा लम्बे समय से चल रहा है। इसके पीछे मोटे सेठिया, व्यापारी और मीडिया समूह के मालिक भी लिप्त बताए जाते हैं।

LEAVE A REPLY