नई दिल्ली। सीमा पर तैनात जवानों को मिलने वाले खराब खाने की शिकायत को लेकर चर्चाओं में आए बीएसएफ के जवान तेज बहादुर अब बर्खास्तगी के बाद अपनी जंग जारी रखेंगे। अपने घर रवाना होने से पूर्व जवान तेजबहादुर ने बताया कि अब मैं वर्दी पहनकर ही इंसाफ की लड़ाई लडूंगा। मेरा मकसद अपनी तनख्वाह में किसी प्रकार की बढ़ोत्तरी कराना नहीं बल्कि जवानों को उनका हक दिलाना है। जवानों को समय पर छुट्टियां और बेहतर खाना मिल सके। तेज बहादुर ने कहा मैं सरकार से अपील करुंगा, पीए नरेन्द्र मोदी से भी मिलूंगा, वहां भी बात नहीं बनी तो न्यायालय में चुनौती दी जाएगी। जहां वर्दी में न्याय के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि पहले तो मुझे पेंशन और रिटायरमेंट के कागजात तैयार कराने को कहा, बाद में सीधा बर्खास्त कर दिया। ऐसे में अब किसी प्रकार की पेंशन या सेवानिवृत्ति का फायदा नहीं मिलेगा, मेरे साथ सही तरीके से ट्रायल नहीं हुआ, गवाह के तौर पर साथी को पेश नहीं करने दिया गया। शिकायत के बाद तो वे मुझे मार डालते, लेकिन मीडिया की सजगता ने बचा लिया। तेज बहादुर की पत्नी शर्मिला ने कहा कि प्रकरण में देश ने साथ दिया, लेकिन केन्द्रीय मंत्री व स्थानीय सांसद इंद्रजीत राव का समर्थन नहीं मिला। जो एक गंभीर विषय है। 20 साल से अधिक समय तक बीएसएफ में नौकरी की अब बर्खास्त कर देना गलत कदम है। तेज बहादुर के पुत्र ने कहा कि सेना में भ्रष्टाचार है, मैं वहां नहीं जाऊंगा। इससे बेहतर इंजीनियरिंग ही है। इधर बीएसएफ ने तेज बहादुर के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि इस मामले में 29वीं बटालियन के किसी अन्य जवान ने यादव के आरोपों की तस्दीक नहीं की। गौरतलब है कि तेज बहादुर ने सुरक्षाबलों को मिलने वाले खराब खाने की शिकायत एक वीडियो के जरिए सोशल मीडिया पर की थी। जो शीघ्र ही वायरल हो गया था। इस मामले में काफी बवाल मचा था।

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