Saharanpur-Violence
Shaharanpur, Buddhists adopted

लखनऊ। सबका साथ सबका विकास के नारे के साथ सत्ता में आई सीएम योगी की भाजपा सरकार के राज्य में उल्ट स्थिति देखने को मिल रही है। यूपी में जातीय हिंसा का दौर जारी होने के साथ ही लोग अब धर्म परिवर्तन पर उतारु हैं। सहारनपुर के इलाके में जातीय हिंसा के भड़कने के बाद हालात अब भी सामान्य नहीं हो पाए हैं। यहां तीन गांवों कपूरपुर, ईघरी व रुपड़ी गांवों के 180 परिवारों ने बौद्ध धर्म अपना लिया। इधर पुलिस अब भीम आर्मी के संस्थापक को तलाशने में जुटी है। संगठन ने सोशल मीडिया पर एक ऑडियो संदेश जारी कर समर्थकों से विरोध प्रदर्शन के लिए 21 मई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर जुटने की अपील की। सहारनपुर में हुई घटना के बाद कपूरपुर गांव के दलित परिवारों में खासा रोष देखने को मिल रहा है। कपूरपुर निवासी दलित महिला पुष्पा देवी ने बताया कि धर्म परिवर्तन को लेकर हमारे ऊपर कोई दबाव नहीं था। भीम आर्मी का कोई दबा नहीं था। ज्यादती के विरोध में धर्म परिवर्तन किया है। शबीरपुर में हमारी बहू-बेटियों के साथ गलत हुआ। हमें हमारा हक नहीं मिल रहा है, क्या करें? अब हम लड़कर अपना हक लेंगे। यहां के दलितों ने न केवल हिंदू धर्म का त्याग कर दिया, वरन अब अपना सरनेम भी बदल लिया। कपूरपुर निवासी मनोज जो सेलून का काम करता था, उसने भी अपना धर्म बदला। उसने बताया कि गुड़ागर्दी की गई, हमारे कई भाईयों के घर आग के हवाले कर दिए गए, पुलिस मूक बनकर सब देखती रही। अब हमने अपनी मर्जी से हिंदू धर्म का त्याग कर दिया है। रुपड़ी गांव में अब लोग मंदिरों में भगवान बुद्ध के जयकारें लगा रहे हैं। लोग अब खुलकर भीम आर्मी का समर्थन कर रहे हैं। गांव के रोशन ने बताया कि हिंदू धर्म में हमें कहीं बैठने तक की जगह नहीं दी जाती, अत्याचार हो रहे हैं, बच्चों पर जुल्म ढहाए जा रहे हैं, आखिर में आहत होकर हमनें बौद्ध धर्म को अपनाया ही लिया। हिंसा का शिकार हुए दलित परिवारों पर गंभीर आरोप लगाकर झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। जबकि हिंसा में शामिल लोगों की शिनाख्त करने के बाद भी पुलिस उन पर हाथ डालने से कतरा रही है। हालांकि मांजरे को भांपकर सहारनपुर डीआईजी जेके शाही ने रिपोर्ट तलब कर ली है।

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