चण्डीगढ़। एक किसान को खेती की भूमि अवाप्त करने के बाद भी मुआवजा नहीं देना भारतीय रेलवे लुधियाना मण्डल को भारी पड़ गया। कोर्ट ने आदेश के बाद भी मुआवजा नहीं देने पर किसान को स्टेशन और शताब्दी ट्रेन का मालिक बनाने का आदेश दिया। लुधियाना की जिला व सत्र न्यायालय ने जमीन अधिग्रहण के एक मामले में रेलवे के किसान को मुआवजा नहीं देने पर यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने आदेश में कहा कि स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस रेल और लुधियाना स्टेशन का मालिकाना हक पीडित किसान सम्पूर्ण सिंह को दिया जाए। किसान की अपील पर कोर्ट ने यह आदेश देते हुए इनकी कुर्की आदेश भी दिया है। दस साल पहले लुधियाना-चंडीगढ़ रेलवे लाइन के लिए रेलवे ने किसान सम्पूर्ण सिंह की जमीन अवाप्त की थी। कोर्ट ने किसान की जमीन का मुआवजा एक एकड़ 25 लाख रुपए से बढ़ाकर 50 लाख प्रति एकड़ कर दिया गया था। इस हिसाब से किसान का मुआवजा 1.47 करोड़ रुपए बना, लेकिन रेलवे ने मात्र 47 लाख ही दिए। शेष एक करोड़ रुपए की राशि नहीं दी। इस पर कोर्ट में याचिका लगाई। कोर्ट ने मुआवजा देने के आदेश दिए, लेकिन फिर भी रेलवे ने मुआवजा नहीं दिया। इस पर कोर्ट ने अब किसान की याचिका पर अदालती आदेश की पालना के लिए सम्पूर्ण सिंह को लुधियान स्टेशन और स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन का तकनीकी तौर पर मालिकाना हक देने के आदेश दिए। कोर्ट के आदेश पर किसान स्टेशन पहुंचा और स्टेशन अधीक्षक व ट्रेन चालक को आदेश दिए। हालांकि यात्रियों को परेशानी नहीं हो, इसलिए ट्रेन को कब्जे में नहीं लिया और उसे जाने दिया। किसान सम्पूर्ण सिंह ने कहा कि यात्रियों को दिक्कत होती इसलिए ट्रेन कब्जे में नहीं ली। रेलवे ने अगर मुआवजा नहीं दिया तो स्टेशन और रेल की नीलामी की अर्जी लगाई जाएगी। क्योंकि ट्रेन और स्टेशन को घर नहीं ले जा सकते।

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