नई दिल्ली। केन्द्रीय सत्ता से हाथ धोने के बाद पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव, फिर मुम्बई म्यूनिसीपल कॉर्पोरेशन और अब एमसीडी चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त ने पार्टी के माथे पर चिंता की रेखाएं खेंच दी है। राहुल गांधी के कमजोर नेतृत्व को लेकर जहां बगावत के स्वर मुखरित होने लगे हैं। वहीं पार्टी के बड़े वर्गों में बेचैनी बढ़ती जा रही है। इन सबके बीच पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी की निष्क्रियता और लगातार चुनावी हार ने यह सकेंत दे दिए हैं कि पार्टी लगातार किसी बड़े संकट की ओर बढ़ रही है। यही वजह रही कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री और पार्टी से राज्यसभा के सदस्य कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग में एक नई पार्टी के गठन को लेकर रजिस्ट्रेशन कराया लिया है। सिब्बल ने इस पार्टी का नाम भी कांग्रेस से मिलता जुलता ”सबकी कांगे्रस” रखा है। बता दें कि सिब्बल अभी-अभी यूपी कांग्रेस से पुन: निर्वाचित होकर राज्यसभा में पहुंंचे हैं। वे देश के सर्वाधिक प्रतिष्ठित वकीलों में एक है। यहां तक की वे कांगे्रस परिवार तथा अन्य कई जाने-माने राजनेताओं, उद्योगपतियों तथा अन्य महत्वपूर्ण लोगों के लिए देश के न्यायालय में पैरवी कर रहे हैं। ऐसे में अब यह सवाल उठकर सामने आ रहा कि आखिर सिब्बल ने इस नई पार्टी का रजिस्टे्रशन क्यों कराया है? या अनावश्यक रुप से जल्दबाजी में उठाया गया कदम है, या फिर एक नई राजनैतिक पार्टी के पंजीकरण की इस कार्यवाही के पीछे अकेले सिब्बल ही हैं या उनके साथ बड़ी तादाद में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की जमात खड़ी है? जो कांग्रेस को तोड़कर एक नई पार्टी बनाने के पीछे अपनी पूरी ताकत लगा देने के लिये तैयार है। माना जा रहा है की संकटों से घिरती जा रही कांगे्रस पार्टी, दिल्ली के एमसीडी चुनावों, जिनके नतीजों के बारे में कांगे्रस पार्टी को हार के पहले से ही संकेत मिल चुके थे, ने अब संगठनात्मक चुनावों का कार्यक्रम तैयार कर लिया है। इन चुनावों से पहले 15 मई को पार्टी सदस्यता अभियान की समाप्ति के बाद, संगठनात्मक चुनावों की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। इस प्रक्रिया में पहले पीसीसी सदस्य तथा एआईसीसी सदस्यों के चुनाव तथा अंत में कांग्रेस के अध्यक्ष पद का चुनाव होगा।

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