emaaraar ko bogee kee aad mein karodon ka phaayada

जेडीए में डेपुटेशन का फुल मजा ले रहे हैं एसई सुरेश मीणा सहित कई इंजीनियर, करोड़ों का फायदा देने के लिए एमआरआर का बढ़ा दिया रेट कॉन्ट्रेक्ट, नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक ही काम को करवा रहे हैं दो-दो बार, साइटों का पुराना सामान स्टोर में जमा होने की बजाए हो रहा है पार, फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद भी वर्क आॅर्डर नहीं कर रहे कैंसिल

जयपुर। जब बाड़ ही खेत को खाने लग जाए तो फिर खेत कैसे बच सकता है ? कुछ ऐसा ही खेल इन दिनों जयपुर विकास प्राधिकरण में चल रहा है। जेडीए के अधिकारी और इंजीनियर्स द्वारा ठेका कंपनियों को करोड़ों का फायदा पहुंचाने के लिए न केवल नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जा रही है, बल्कि मोटा कमीशन हासिल करने के लिए जेडीए को करोड़ों रूपए का चूना भी लगाया जा रहा है। जेडीए में लंबे समय से मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर जमकर मेहरबानी चल रही है। सेक्टर रोड पर बिजली की लाइनों की शिफ्टिंग का कार्य हो या फिर स्ट्रीट लाइटें लगाने कार्य, मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर जेडीए अधिकारी और इंजीनियर्स दिल खोल के मेहरबानी दिखा रहे हैं। मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स पर इस मेहरबानी के पीछे जेडीए अधिकारी और इंजीनियर्स का क्या फायदा है, ये तो वे ही जानते हैं, लेकिन हां, इतना जरूर है कि इस मेहरबानी के लिए जेडीए इंजीनियर्स को नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई संकोच नहीं है।
यूडीएच सर्कुलर के हिसाब से 11 केवी और 33 केवी की हाईटेंशन केबल में लेबर कॉस्ट शामिल होती है, जिसमें बेसिक कॉस्ट के साथ ही 10 प्रतिशत सिविल चार्ज, 10 प्रतिशत लेबर चार्ज और 20 प्रतिशत ओवरहैड चार्ज शामिल होता है। जेडीए की ओर ओर से इसका भुगतान जेवीवीएनएल को किया जाता है। जेवीवीएनएल की ओर से इसकी टेक्निकल सेंशन भी इसी हिसाब से निकाली गई थी, लेकिन जेडीए इंजीनियर्स की ओर से मैसर्स एमआरआर को फायदा पहुंचाने के लिए केबल बिछाने के लिए तैयार बोगी की आड़ में लेबर चार्ज का भुगतान किया जा रहा है। नियमानुसार जेडीए की ओर से लेबर चार्ज का भुगतान जेवीवीएनएल को किया जाना है, लेकिन इंजीनियर्स की मिलीभगत से इसका भुगतान मैसर्स एमआरआर को भी किया जा रहा है, जो कि पूरी तरह से फर्जी भुगतान है। इससे पहले जेडीए इंजीनियर्स की ओर से फर्जीवाड़ा करते हुए 2015 में टेक्निकल सेंशन की धज्जियां उड़ाते हुए न्यू सांगानेर रोड से पत्रकार कॉलोनी सेक्टर रोड़ की चैड़ाई 100 फीट करने की बजाए 20 से 30 फीट बढ़ाकर ही मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को बिजली की लाइनें बिछाने, शिफ्टिंग और स्ट्रीट लाइटें लगाने का करीब 15 करोड़ का काम सौंप दिया था, जबकि टेक्निकल सेंशल में स्पष्ट लिखा था कि सेक्टर रोड की चैड़ाई 100 फीट करने के बाद ही बिजली की लाइनें बिछाने और स्ट्रीट लाइटें लगाने का कार्य किया जाएगा। जेडीए इंजीनियर्स की ओर से अब फिर से न्यू सांगानेर रोड से पत्रकार कॉलोनी सेक्टर रोड की चैड़ाई 100 फीट कर फिर से बिजली की लाइनों को शिफ्टिंग और स्ट्रीट लाइटें लगाने का कार्य 8 करोड़ का कार्य मैसर्स एमआरआर से करवाया जा रहा है। जेडीए अधिकारी और इंजीनियर्स की मिलीभगत से एक ही कार्य को मैसर्स एमआरआर से दो-दो बार करवाकर फर्म को करोड़ों रूपए का फायदा पहुंचाया जा रहा है। मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स को फायदा पहुंचाने के लिए जेडीए इंजीनियर्स की ओर से पिछले महिने फर्म का रेट कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के बाद उसका रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ा दिया था, ताकि फर्म को फिर से करोड़ों का काम दिया जा सके। इतना ही नहीं रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाने के बाद आचार संहिता के दिन बैकडेट में फर्म को 6 अक्टूबर, 2018 की तारीख में ही कई टेक्निकल सेंशन निकालकर उसी दिन करोड़ों रूपए के वर्क आॅर्डर भी जारी कर दिए गए।

डेपुटेशन का फुल मजा ले रहे हैं एसई सुरेश मीणा सहित कई इंजीनियर
जेडीए में डेपुटेशन पर लगे कई इंजीनियर लंबे समय से जमे बैठे हैं और ठेका कंपनियों के साथ मिलकर जमकर फर्जीवाड़ा कर रहे हैं। जेडीए में एसई सुरेश मीणा साढ़े तीन सालों से जमे बैठे हैं। जेडीए में डेपुटेशन पर एक्सईएन लगे थे और अब प्रमोशन के बाद एसई बनकर जेडीए में ही लगे हुए हैं। सुरेश मीणा इससे पहले आमेर विकास प्राधिकरण में डेपुटेशन पर एईएन लगे थे और वहीं प्रमोशन के बाद एक्सईएन बन गए थे। 4 साल तक आमेर विकास प्राधिकरण में रहने के बाद डेपुटेशन पर 4-5 साल हाउसिंग बोर्ड में एक्सईएन रहे। और इसके बाद जेडीए में डेपुटेशन पर एक्सईएन लग गए थे और तभी से यहां जमे बैठे हैं। इसके अलावा जेडीए में अधिशाषी अभियंता सी.पी.गुप्ता, भंवरसिंह राठौड सहित कई इंजीनियर भी लंबे समय से जमे बैठे हैं।
2 साल पहले लगे पोल व स्ट्रीट लाइटों का क्यों नहीं कर रहे उपयोग
पृथ्वीराजनगर क्षेत्र की सेक्टर रोड की न्यू सांगानेर रोड से पत्रकार कॉलोनी, महारानी गार्डन से मांग्यावास 100 फीट रोड और न्यू सांगानेर रोड से मुहाना मंडी रोड वाया सरस्वती कॉलोनी रोड की चैड़ाई के दौरान बिजली लाइनों की शिफ्टिंग में उसी एचटी केबल, पोल और स्ट्रीट लाइटों का उपयोग करने की बजाए नए सामान का प्रावधान क्यों रखा गया, जबकि दो साल पहले ही इन रोड की चौड़ाई 20 से 30 फीट बढ़ाने के दौरान बिजली की एचटी केबल, पोल और स्ट्रीट लाइटें लगाई गई थी। फिर जेडीए इंजीनियर्स द्वारा दुबारा चैड़ाई में पुरानी केबल, पोल और स्ट्रीट लाइटों को लगाने की बजाए नई केबल, पोल और स्ट्रीट लाइटों का प्रस्ताव तैयार कर क्यों करोड़ों रूपए की बबार्दी की जा रही है। क्या ये भी ठेका फर्मों का लाभ पहुंचान की साजिश है। जबकि इन साइटों से पुराना सामान अभी तक स्टोर में जमा नहंी कराया गया है।

एसई सुरेश मीणा को वर्क आॅर्डर का पावर
जेडीए में मैसर्स एमआरआर कंपनी की पहुंच बहुत ऊपर तक है, इसलिए तो उसने अपने कार्यों के लिए वर्क आॅर्डर का पावर एक्सईएन की जगह एसई सुरेश चंद मीणा को दिलवा दिया। जेडीए के इतिहास में यह पहला मौका है, जब किसी फर्म के लिए वर्क आॅर्डर का पावर एक्सईएन से छीनकर एसई को दिया गया, जबकि इससे पहले जेडीए में इन कार्यों में वर्क आॅर्डर देने का पावर एक्सईएन के पास ही होता था, लेकिन मैसर्स एमआरआर के इस स्पेशल मामले में वर्क आॅर्डर का पावर एसई सुरेश मीणा को दिया गया, जो कि पूरे जेडीए में चर्चा का विषय रहा। दरअसल मैसर्स एमआरआर इलेक्ट्रिकल्स ने मोटा फायदा उठाने के लिए आलाधिकारियों पर दबाव बनाकर वर्क आॅर्डर का पावर एसई सुरेश मीणा को दिलवाया ताकि फर्म के सभी फर्जीवाड़ों को दबाने के साथ ही करोड़ों रूपए के कार्यों में मोटा माल कमाया जा सके। जेडीए में ठेका फर्मों, अधिकारियों और इंजीनियर्स की मिलीभगत का इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है।

काम शुरू होने से पहले दौड़ी भुगतान की फाइल
जेडीए में मैसर्स एमआरआर पर मेहरबानियों का खेल लगातार जारी है। जेडीए की ओर से पहले तो मैसर्स एमआरआर का रेट कॉन्ट्रेक्ट खत्म होने के बाद रेट कॉन्ट्रेक्ट बढ़ाकर फर्म को करोड़ों रूपए के काम दे दिए। उसके बाद आचार संहिता में बैकडेट पर फर्म को एक ही दिन में टेक्निकल सेंशन से लेकर वर्क आॅर्डर तक जारी कर करोड़ों के काम सौंप दिए गए। इसके बाद भी फर्म पर जेडीए अधिकारी और इंजीनियर्स की मेहरबानी नहीं थमी। जेडीए इंजीनियर्स ने मिलकर अब मैसर्स एमआरआर को बिना काम शुरू किए ही कार्य का भुगतान कराने की फाइल भी दौड़ा दी है। फर्म द्वारा न्यू सांगानेर रोड से पत्रकार कॉलोनी, महारानी गार्डन से मांग्यावास 100 फीट सेक्टर रोड और न्यू सांगानेर रोड से मुहाना मंडी रोड वाया सरस्वती कॉलोनी रोड की चैड़ाई 100 फीट कर फिर से बिजली की लाइनों को शिफ्टिंग और स्ट्रीट लाइटें लगाने का 8 करोड़ का कार्य किया जा रहा है। फर्म द्वारा इन सेक्टर रोड पर बिजली की लाइनों और स्ट्रीट लाइटों की शिफ्टिंग का कार्य अभी शुरू भी नहीं किया है फिर भी जेडीए इंजीनियर सी.पी. गुप्ता ने फर्म के भुगतान की फाइल तेजी से दौड़ा दी है। जेडीए में मैसर्स एमआरआर पर इंजीनियर्स की इतनी मेहरबानी का खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन आलाधिकारियों सहित जेडीसी द्वारा पूरे मामले पर कोई कार्रवाई नहीं करना पूरे जेडीए की मिलीभगत को साबित कर रहा है।

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